मौजूदा सत्र में पहली श्रेणी के छात्रों को इस शर्त से छूट दी गई और दूसरी श्रेणी के छात्रों को इस छूट का कोई लाभ नहीं दिया गया। दूसरी श्रेणी के कुछ छात्रों ने इस छूट का लाभ मांगते हुए कहा कि उनके साथ सरकार भेदभाव कर रही है।
शैक्षणिक सत्र 2013-14 से लेकर 2017-18 तक दोनों तरह की श्रेणियों के छात्रों को दाखिले में छूट दी गई थी, जबकि इस बार उन्हें यह छूट नहीं दी जा रही है। कोर्ट ने मामले पर पिछली सुनवाई के बाद काउंसलिंग के बाद पहली श्रेणी के छात्रों का ब्योरा मांगा था, जिससे उनको याचिकाओं में प्रतिवादी बनाया जा
सके और वे कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रख सकेें। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश विवेक ठाकुर की खंडपीठ ने एचपीयू के आवेदन पर उन्हें यह ब्योरा पांच जुलाई तक कोर्ट के समक्ष रखने के आदेश दिए।
कोर्ट ने इसके अलावा दोनों श्रेणियों के उन छात्रों का भी ब्योरा मांगा है, जिन्हें वर्ष 2013 से वर्ष 2017 तक इस छूट का लाभ दिया जा चुका है। इस मामले पर सुनवाई पांच जुलाई को होगी।