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रिपोर्ट से खुलासा, हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल

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हिमाचल प्रदेश की जनता को केंद्र और प्रदेश की दोनों सरकारों से इस बार के बजट में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और इसे हर व्यक्ति की पहुंच तक बनाए जाने को लेकर प्रभावी कदम उठाए जाने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेश के हर स्वास्थ्य केंद्र और अस्पतालों में चल रही स्टाफ की कमी को दूर करने,
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केंद्र की स्वास्थ्य संबंधित योजनाओं का लाभ इसके असल हकदार आम और गरीब आदमी तक पहुंचाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए जाने की आस जनता लगा कर बैठी है। प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनएचआरएम) पर शोध कर रहे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय स्थित एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान (आईआईएचएस) के प्रोजेक्ट ऑफिसर डॉ. बलदेव सिंह नेगी ने प्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का आंकलन किया, और सरकारी आंकड़े जुटाए है।
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ये है स्टाफ की स्थिति

जनगणना 2011 के मुताबिक पहाड़ी राज्य हिमाचल की 90 फीसदी जनता प्रदेश के 20690 गांवों में रहती है, 58.86 प्रतिशत परिवार हैं जो ज्यादा से ज्यादा 5 पांच हजार मासिक कमाई पर गुजारा कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र की इस आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा 2703 स्वास्थ्य संस्थानों के जिम्मे है। इनमें 2065 स्वास्थ्य उप केंद्र, 500 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 78 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 48 खंड स्तरीय अस्पताल और बारह जिला अस्पताल पर है।

66 स्वास्थ्य उप केंद्रों में फीमेल हेल्थ वर्कर नहीं, डिस्पेंसरी में कुल 566 फिमेल हेल्थ वर्कर, उप केंद्रों में 1087 मेल हेल्थ वर्कर, पीएचसी में 373 सहायक फीमेल हेल्थ वर्कर, 431 मेल हेल्थ वर्कर, चिकित्सकों के 65 पद खाली हैं। सीएचसी में सर्जन के 77, महिला रोग विशेषज्ञ के 77, फीजिशियन के 75, शिशु रोग विशेषज्ञ के 76 पद खाली हैं। रेडियोग्राफर के 35, फार्मासिस्ट के 122, प्रयोगशाला तकनीशियनों के 421 जबकि नर्सिंग स्टाफ के 411 पद खाली है। यही नहीं ब्लॉक एक्सटेंशन आफिसर के 87 पर भी खाली चल रहे हैं।
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