खुद के खर्चे पर मरीज करवा रहे महंगा इलाज
हिमकेयर के टेंडर न हो पाने के कारण नहीं मिल पा रहीं दवाइयां
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य बीमा योजना हिमकेयर के तहत मरीजों को मुफ्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इलाज, सर्जरी और दवाइयों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। सरकार ने हाल ही में आईजीएमसी को हिमकेयर योजना के लंबित भुगतान के तहत 15 करोड़ रुपये की राशि जारी की है, लेकिन मरीजों को फिलहाल राहत नहीं मिल पाई है।
जिन मरीजों को हार्ट, न्यूरो या कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज मिलना था, वे या तो खुद के खर्च पर इलाज करवा रहे हैं या बिना ऑपरेशन के ही घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। अस्पताल में पेसमेकर, स्टेंट और जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। वेंडरों ने लंबित भुगतान के कारण दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति रोक दी है। हिमकेयर के तहत आईजीएमसी में दवाइयों की सप्लाई करने वाली कंपनी ने सरकार से बकाया न मिलने के कारण करार रेन्यू नहीं किया है। आईजीएमसी को करीब 100 करोड़ बकाया कंपनी को चुकाना है। अप्रैल से दवाइयों के सप्लायर के लिए टेंडर आबंटित किए गए थे, लेकिन अब तक दवाइयों की आपूर्ति नहीं हो पाई है।
कांगड़ा के एक तीमारदार ने बताया कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए स्टेंट लेने को कहा है, लेकिन अस्पताल में नहीं मिला। बाहर से 80,000 रुपये में खरीदना पड़ा। हिमकेयर कार्ड होते हुए भी इतनी बड़ी राशि खर्च करनी पड़ी। हिमकेयर योजना में प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान हालात में यह योजना केवल कागजों तक सीमित लग रही है। आईजीएमसी में कई ऑपरेशन केवल इस वजह से टाले जा रहे हैं क्योंकि अस्पताल के पास जरूरी उपकरण नहीं हैं। फरवरी में भी सरकार ने 15 करोड़ रुपये जारी किए थे, लेकिन देनदारी इतनी अधिक है कि स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। जब तक पूरी देनदारी नहीं चुकाई जाती और सप्लाई पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक मरीजों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही।