जोखिमपूर्ण आबादियों में अब इनको किया गया है शामिल
टीबी की जोखिमपूर्ण आबादियों में 10 साल की आयु से कम वाले बच्चे, बुजुर्ग, कुपोषण के रोगी, टीबी रोगियों के संपर्क वाले, पहले से उपचारित टीबी मरीज, सीओपीडी मरीज, अस्थमा रोगी, सिलिकोसिस रोगी, पोस्ट कोविड मरीज, इनडोर वार्ड के मरीज, मधुमेह के रोगी, उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, कमजोर लीवर वाले, गुर्दे की बीमारी के मरीज, डायलिसिस पर मरीज, उपशामक देखभाल रोगी, कैंसर रोगी, एंटी-टीएनएफ उपचार पर मरीज, इम्यूनोसप्रेसेन्ट्स पर मरीज, अंग प्रत्यारोपण रोगी, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जेल के कैदी, शरणार्थी और प्रवासी, अनाथालय, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन, आश्रय गृह और अन्य सामूहिक स्थान, छात्रावास के छात्र, झुग्गी बस्तियों और अस्थाई परिवेश, नशा मुक्ति केंद्र के रोगी, धूम्रपान करने वाले, शराबी, खनिज एवं पत्थर क्रशर में काम करने वाले, ईंट भट्ठा मजदूर, निर्माण स्थल श्रमिक, चाय बागान श्रमिक, बुनकर, एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्ति, एचआईवी के जोखिम वाली आबादी, जनजातीय जनसंख्या, घर के अंदर वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाला व्यक्ति, एडल्ट बीसीजी टीकाकरण के लाभार्थी, स्वास्थ्य देखभाल कर्मी, प्राइवेट रेफरल से मरीज, एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के संभावित मरीज इस श्रेणी में शामिल हैं।
नॉट आधुनिक जांच है जो आरटी पीसीआर की तरह पक्की जांच करती है। इस जांच से कम कीटाणु हो तब भी टीबी का पता चल जाता है। सरकार की ओर से टीबी की जोखिमपूर्ण आबादी का दायरा बढ़ाया गया है। अब इसमें 30 की बजाय 45 श्रेणियों को शामिल किया गया है। - डॉ. राजेश सूद, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, कांगड़ा