नई टैक्स पद्धति पर प्रापर्टी टैक्स वसूल करने में नाकाम रहे नगर निगम को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है।
बुधवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश त्रिलोक चौहान की खंडपीठ ने नगर निगम को पुरानी पद्धति रेंट बेस के आधार पर टैक्स वसूलने के आदेश दे दिए हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भवन मालिकों द्वारा जमा करवाई गई टैक्स राशि नई कर प्रणाली के निर्धारण पर निर्भर करेगी और टैक्स राशि के अंतर को समायोजित किया जाएगा।
बुधवार को आया यह फैसला आर्थिक तंगी से गुजर रहे नगर निगम के लिए संजीवनी बन कर आया है।
‘अमर उजाला’ ने उठाई थी शहरवासियों की आवाज
हाईकोर्ट ने ‘अमर उजाला’ के 18 मार्च 2013 के अंक में शीर्षक ‘हजार गृहकर डिफाल्टरों को नोटिस’ से प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए 22 मार्च 2013 को नगर निगम शिमला को साल 2012-13 का टैक्स पुरानी पद्धति से वसूलने के आदेश दिए थे।
तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरबी मिश्रा और न्यायाधीश राजीव शर्मा की खंडपीठ ने ‘अमर उजाला’ द्वारा जनहित में दूरगामी प्रभाव वाले इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए सराहा भी था।