शिमला के गेयटी थियेटर में हथकरघा प्रदर्शनी
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गेयटी थियेटर के टेवर्न हॉल में मंगलवार को हथकरघा प्रदर्शनी शुरू हो गई। इसमें कुल्लू के 10 से अधिक कारीगरों ने हाथ से बने ऊन के उत्पादों के स्टॉल लगाए हैं। इनमें पश्मीना, खरगोश और लैम्ब्स की ऊन की शॉल, कुल्लू की पारंपरिक शॉल, सदरी, कोट, टोपी तथा जुराबें शामिल हैं। इन स्टॉलों पर पहले दिन ही दिन खरीददारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी।
प्रदर्शनी 12 जुलाई तक चलेगी। दी त्रिपुरा हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट वीवर्स को ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड नगर जिला कुल्लू की ओर से यह प्रदर्शनी लगाई है। कारीगर राजकुमार ने बताया कि प्रदर्शनी में उन्होंने लैम्ब्सवूल (मेमने की ऊन) की शॉल की प्रदर्शनी भी लगाई है। यह शॉल मेमने की ऊन से तैयार होने के चलते बेहद मुलायम होती है। शॉल के चारों ओर हाथ से चंबा की कढ़ाई की है। इसकी कीमत 4,000 से 10,000 रुपये तक है।
पश्मीना शॉल 5,000 से 20,000 रुपये तक है। यह शॉल मुलायम होने के साथ ही काफी हल्की होती है। खरगोश की ऊन की शॉल 2,000 रुपये से शुरू है। इसके अलावा उन्होंने कुल्लू की पारंपरिक पट्टी वाली शॉल भी बिक्री के लिए रखी है। इस शॉल की कीमत 5,000 से 15,000 रुपये तक है। बताया कि यह सब उत्पाद हाथ से तैयार किए हैं। मफलर 300 रुपये से होकर 4,000 रुपये तक है। इसके अलावा प्रदर्शनी में चंबा शॉल, किन्नौरी, नूरपुर और लद्दाखी शॉल की भी प्रदर्शनी लगाई है।