निर्माणाधीन पुल हुआ ध्वस्त (फाइल फोटो)
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विधानसभा क्षेत्र भोरंज में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरने की घटना के दो सप्ताह बाद भी कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा सकी है। जबकि, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सार्वजनिक मंच से कहते हैं कि यह सरकार सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए आई है। लेकिन, मुख्यमंत्री के दावे धरातल पर नजर नहीं आते। लोक निर्माण विभाग की लेटलतीफी से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस मामले को महज खानापूर्ति के बाद फाइलों में दबाया जा रहा है।
ढाई करोड़ का यह टेंडर लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2020 में सरकारी ठेकेदार को आवंटित किया था। दिसंबर 2022 को आवंटित कार्य पूरा होना था। लेकिन, अभी तक 70 फीसदी काम अधूरा है। 30 मार्च की रात अचानक निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिर गया। जबकि, समय-समय पर इस पुल का निरीक्षण करने के बाद लोक निर्माण विभाग के अधिकारी यहां संबंधित ठेकेदार को करीब एक करोड़ का भुगतान कर चुके हैं।
पुल गिरने से कुछ दिन पूर्व भी संबंधित ठेकेदार को विभाग की ओर से सुरक्षित भुगतान (सिक्योर पेमेंट) हुआ है, जिसकी सारी सूचना सरकारी रिकॉर्ड पर उपलब्ध है। पुल का स्लैब गिरने के तीसरे दिन शिमला स्थित लोक निर्माण विभाग की क्वालिटी कंट्रोल विंग की टीम जाहू पुल का मुआयना करने पहुंची थी। टीम ने सैंपल भी एकत्रित किए। लेकिन, लैब टेस्ट में सैंपल का क्या स्टेटस है, यह बताने में अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं। उधर, स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है।
जाहू में निर्माणाधीन पुल के स्लैब गिरने के मामले में क्वालिटी कंट्रोल विंग की टीम को मौके पर भेजा गया था। जांच टीम ने सैंपल भी एकत्रित किए हैं। वहीं, अधीक्षण अभियंता हमीरपुर से भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद निश्चित तौर पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-ई. अजय गुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ, लोनिवि शिमला।