शिक्षकों का आरोप है कि छात्र पढ़ाई में कमजोर होने के साथ स्कूल में सफेद चूहे लाने के साथ ही अन्य छात्र-छात्राओं को परेशान करता था।
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शिमला के संजौली में सरकारी स्कूल से एक नौंवी के छात्र को जबरन स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट थमाने का मामला सामने आया है। छात्र सुनील की मां ने स्कूल प्रशासन से उसे स्कूल से न निकाले जाने की गुहार लगाई। लेकिन शिक्षकों ने एक न सुनी।
स्कूल प्रशासन ने उसे भट्टाकूफर या ढली स्कूल में प्रवेश लेने को कहा। शिक्षकों का आरोप है कि छात्र पढ़ाई में कमजोर होने के साथ स्कूल में सफेद चूहे लाने के साथ ही अन्य छात्र-छात्राओं को परेशान करता था। उसे कई सुधरने का मौका दिया गया।
अनुशासनहीनता के लिए उसके घर वालों और उसकी मा को भी सूचित किया गया लेकिन उसमें कोई सुधार नहीं हुआ। इसके अलावा भी स्कूल प्रबंधन की ओर से छात्र पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्र की मां को जब इस बात का पता चला तो वह स्कूल प्रबंधन के पास पहुंची।
बेटे को स्कूल से न निकालने की गुहार लगाती रही। उसकी आंखों से निकल रहे आंसू उसकी मजबूर मजदूरी करने वाली मां की बेबसी बयां कर रहे थे। मामला मीडिया में आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने कहा कि वह छात्र को एक और मौका देने के लिए तैयार हैं।
उधर , इस बारे में संजौली सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पवन सोनी का कहना है कि छात्र को एक और मौका दे दिया जाएगा, अगर वह कक्षा में अपने व्यवहार में सुधार लाए। छात्र चाहे तो स्कूल में दोबारा प्रवेश ले सकता है।