सड़कों, पानी और सरकारी भवन निर्माण से संबंधित योजनाओं के लिए हिमाचल में विधायकों का सालाना बजट बढ़ाने की तैयारी हो चुकी है। नाबार्ड से वित्तपोषण के लिए अब इस सीमा को 100 करोड़ रुपये या इससे अधिक किया जा रहा है।
विधायकों की इस मांग को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपने नए बजट में पूरा कर सकते हैं। सरकार ने वर्तमान में विधायकों की योजनाओं पर 90 करोड़ की सीलिंग लगा रखी है। यानी, हर विधायक इसी सीलिंग में अपने हलके की योजनाएं नाबार्ड को भेज सकता है।
28 और 29 दिसंबर 2018 को विधायक प्राथमिकता योजनाओं के नाबार्ड से वित्तपोषण की बजट सीमा को बढ़ाने की मुख्यमंत्री से मांग की। नालागढ़ के विधायक लखविंद्र सिंह राणा ने इसे बढ़ाकर 120 करोड़ रुपये करने का अनुरोध किया।
रेणुका के विधायक विनय कुमार ने भी इसे 20 से 30 करोड़ रुपये बढ़ाने की मांग की थी। पच्छाद के विधायक सुरेश कुमार, रामपुर के विधायक नंदलाल, रोहड़ू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी, चिंतपूर्णी के विधायक बलवीर सिंह आदि ने भी इसे बढ़ाने की मांग की।
इनका तर्क था कि 90 करोड़ रुपये की ही डीपीआर नाबार्ड को भेजे जाने से पीछे बहुत योजनाएं फंस गई हैं। इनका वित्तपोषण नहीं हो पा रहा है। चूंकि, ये सभी योजनाएं आम आदमी से जुड़ी हैं, इसलिए इनके लिए बजट सीलिंग को बढ़ाए जाने की जरूरत है।
सूत्रों की मानें तो वित्त और योजना विभागों में इस बारे में मंत्रणा चली हुई है कि इस सीमा को कितना बढ़ाया जाए। इससे पूर्व इस सीमा को 80 से बढ़ाकर 90 करोड़ किया गया था।
चर्चा यह की जा रही है कि इसे केवल दस करोड़ बढ़ाया जाए कि इसे ज्यादातर विधायकों की मांग के अनुरूप 20 से 30 करोड़ रुपये किया जाए। ऐसे में इस सीलिंग का 100 करोड़ रुपये से अधिक का रखा जाना तय है। यानी इसे 100 से लेकर 120 करोड़ रुपये तक बढ़या जा सकता है।