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Shimla: आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम का न्योता नहीं देने पर राज्यपाल ने जताई नाराजगी, ये कहा

Fri, 06 Dec 2024 05:30 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

राज्यपाल चाैड़ा मैदान में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उन्होंने राजभवन में ही संविधान निर्माता को श्रद्धांजलि दी। 
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि पर उचित आमंत्रण नहीं दिए जाने पर राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने सरकार से नाराजगी जताई है। शुक्रवार को राज्यपाल चाैड़ा मैदान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उन्होंने राजभवन में ही श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के संविधान के साथ राजनीति नहीं होनी चाहिए। संविधान के अनुसार चलने के लिए लोगों को संकल्प लेना चाहिए। राज्यपाल ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि आज संविधान दिवस तो मना रहे हैं लेकिन कुछ लोग बिना वजह के संविधान को हवा में लहराते रहते हैं।

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राज्यपाल ने कहा कि पिछली बार वह जयंती पर चाैड़ा मैदान गए थे। यह कार्यक्रम नगर निगम करता है। उन्हाेंने कहा कि इस बार नगर निगम का एक कार्ड उनके पास आया, जिसमें मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में बुलाया है। वही कार्ड उन्होंने (एमसी) हमारे पास भेजा है। मुझे इस संबंध में न तो किसी अधिकारी ने संपर्क किया और न ही मुझे बुलाने की कोई औपचारिकता समझी। ऐसी स्थिति में भारत के नागरिक होने के नाते मैंने उचित समझा कि राजभवन में ही कार्यक्रम मनाना चाहिए। इसमें क्या राजनीति है, मैं इस संबंध में कुछ नहीं जानता हूं। राज्यपाल ने डॉ. आंबेडकर से जुड़ी पंच तीर्थ योजना शुरू करने पर केंद्र सरकार को सराहा भी। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात पर राज्यपाल ने कहा कि पीएम को प्रदेश में नशे के खिलाफ शुरू किए गए अभियान को लेकर जानकारी दी है।
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विधेयकों को लेकर सरकार की जबरदस्ती स्वीकार नहीं
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि राजभवन में सरकार का कोई बिल लंबित नहीं हैं। सरकार को ऐसा लगता है तो स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि जो बिल थे उन्हें आपत्तियों के साथ भेजा हैं जबकि विश्वविद्यालय से जुड़े बिल के संदर्भ में मेरा दायित्व है कि सरकार क्या जबरदस्ती कर रही हैं, उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों को वेतन के अलावा कुछ नहीं देती हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय कैसे खर्चा चला पाता है। राज्य सरकार वेतन के 70 फीसदी खर्च का प्रबंध करती है, लेकिन शेष 30 फीसदी का इंतजाम विश्वविद्यालय को अन्य स्रोतों से करना पड़ता है। सरकार के दावों के बावजूद वित्तीय समस्याएं बनी हुई हैं। इसके अलावा नियुक्तियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी देरी हो रही है।


 

कांग्रेस पार्टी की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है : कश्यप
 भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने  कांग्रेस पार्टी की सरकार ने राज्यपाल को आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस पर ना बुलाने पर मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि आज भारतीय संविधान के रचनाकार भारत रत्न डाॅ. भीमराव आंबेडकर की महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर पूरा देश उनको नमन कर रहा है। डॉ. अंबेडकर जिन्होंने सदा ही समाज में समानता और समरसता को विशेष स्थान दिया और कानून के सामने सब लोग एक हैं, एक समान हैं इस विचार के साथ दलितों, शोषित, वंचितों के लिए उन्होंने जो लड़ाई लड़ी और पूरा देश उनको नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर आगे चलने का प्रयास कर रहा है, लेकिन बहुत खेद का विषय है कि हिमाचल प्रदेश में जहां विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए लेकिन प्रदेश के प्रथम नागरिक राज्यपाल को किसी भी कार्यक्रम का न्योता ना दिया जाना कांग्रेस पार्टी की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
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नगर निगम शिमला के द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया ,अन्य कार्यक्रम हुए, सरकारी कार्यक्रम हुए, प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सम्मिलित हुए लेकिन राज्यपाल को किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।  यह सीधे-सीधे जो संकीर्ण मानसिकता कांग्रेस सरकार की है उसको दर्शाता है। सरकार बार-बार राज्यपाल को लेकर अनेक प्रकार के गंभीर आरोप लगाने का प्रयास करती है। प्रदेश में कोई भी बिल राज्यपाल के पास लंबित नहीं पड़ा है और प्रदेश को लेकर महामहिम का सदा ही बड़ा सकारात्मक रुख रहा है। राज्यपाल का पद एक सांविधानिक व्यवस्था है, आज प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है लेकिन जिस प्रकार से कांग्रेस के नेता हर मामले में राजनीति करने का प्रयास करते हैं, वह प्रदेश के हित में नहीं है। दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने को है और दो वर्ष में कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश को 10 साल पीछे धकेलने का काम किया है। 
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