हिमाचल हाईकोर्ट का स्वर्ण जयंती समारोह
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हिमाचल में अच्छी न्याय व्यवस्था है। लोगों को समय पर न्याय मुहैया करवाया जाता है। यह बात राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने हाईकोर्ट के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पीटरहॉफ में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में कही। कहा कि कानून के राज की प्रदेश की न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका रही है। यह प्रदेश में लोगों को न्याय दिलाने के लिए जरूरी भी है, क्योंकि देरी से न्याय मिलना न्याय न मिलने के बराबर होता है।
मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी ने हाईकोर्ट की ओर से दिए गए योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में हाईकोर्ट की अग्रणी भूमिका रही है। इसमें न्यायाधीशों के अलावा सरकार व वकीलों का अहम योगदान रहा है। हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी ने हाईकोर्ट की स्थापना से लेकर आज तक हाईकोर्ट में रहे न्यायाधीशों के योगदान का उल्लेख कर उनकी निभाई भूमिका के बारे में बताया।
उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश वीके गुप्ता के प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में किए योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में पूरे प्रदेश की न्यायिक प्रणाली ने अभूतपूर्व तरक्की की। महाधिवक्ता अशोक शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने 50 वर्ष के कार्यकाल में लोगों को सस्ता न्याय पहुंचाने के लिए अहम भूमिका निभाई है।
अधिवक्ताओं ने बिना फीस कार्य करते हुए जनहित में न्याय मुहैया करवाने को कार्य किया है। हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थों ने भी बिना फीस आपसी सुलह के माध्यम से न्याय मुहैया करवाने के लिए कार्य किया। 25 जनवरी 1971 को प्रदेश हाईकोर्ट स्थापित किया गया था। हाईकोर्ट के कई मुख्य न्यायाधीश व न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनाए गए हैं।