राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि यूरोप के वैज्ञानिकों से हमारे देश के ऋषि बड़े थे, जो हर चीज का सही अनुमान लगाते थे। इन्होंने धार्मिक मान्यता से ही विज्ञान का आविष्कार किया है। अंधविश्वास और आपस की फूट ने हमें गुलाम बनाया था। इससे बाहरी लोगों ने हमारी योजनाओं को सुनियोजित ढंग से नष्ट किया। विज्ञान के बिना काम नहीं, लेकिन विज्ञान और धर्म को आपस में मिलना चाहिए।
राज्यपाल कृषि विवि पालमपुर में विज्ञान भारती की ओर से छात्रों के लिए किए गए वार्षिक वितरण समारोह में बोल रहे थे। कहा कि शिक्षक छात्रों को ऐसी शिक्षा दें कि वे आने वाले भारत का अच्छा निर्माण कर सकें। राज्यपाल ने समारोह में बच्चों को सम्मानित किया। इससे पहले उन्होंने कृषि विवि विभिन्न केंद्रों का दौरा किया।
उन्होंने वैज्ञानिकों को गुणवत्ता में सुधार लाने के भी निर्देश दिए। जैविक कृषि विभाग के तहत कार्यरत शून्य बजट जैविक खेती का भी दौरा किया और विवि की ओर से उनके मिशन के तहत प्राकृतिक खेती करने और प्राकृतिक खेती के प्रदर्शन को पूरी तरह तैयार करने पर संतोष जाहिर किया। उन्होंने उपायुक्त सीपी वर्मा को विवि के वैज्ञानिकों, अधिकारियों और उद्यान विभाग के साथ जिला स्तर पर बैठक करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान प्रक्रिया प्रणाली संतोषजनक नहीं है और विशेषज्ञों को एक पशु से दूसरे पशु में संक्रमण फैलने की दर को कम करने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। भारतीय नस्ल की गायों को संरक्षित करना अति महत्वपूर्ण है। विवि के कुलपति प्रो. अशोक सरियाल समेत कई लोग मौजूद रहे।