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राज्यपाल ने खुद उठाया गंदा कपड़ा, व्यवस्था पर हुए तल्ख

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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विशेष स्कूल ढली में पानी के बीच सड़ रहा एक गंदा कपड़ा उठाया और उसे किनारे फेंका। गंदगी का कड़ा नोटिस लिया। वह नारी निकेतन मशोबरा की अव्यवस्था से भी असंतुष्ट दिखे। बुधवार को शिमला के मशोबरा स्थित नारी सेवा सदन और ढली स्थित दृष्टिबाधित मूक-बधिर विशेष स्कूल का राज्यपाल ने औचक दौरा किया।
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संस्थानों में दी जा रहीं सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने स्वच्छता बनाए रखने और समुचित डाइट चार्ट अपनाने में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करने को कहा। नारी सेवा सदन में रह रहीं महिलाओं और ढली स्कूल के बच्चों से बातचीत की। उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रबंधन को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।

बोले, सुविधाओं का प्रबंध करें

कहा कि नारी सेवा सदन की उन नारियों के लिए अलग आश्रय गृह स्थापित किए जाने चाहिए, जो विभिन्न प्रकार की मनोविकृति अथवा मानसिक बीमारी के लिए उपचाराधीन हैं। इन्हें विशेष इलाज और देखभाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने चिकित्सा एवं परामर्श सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर भी बल दिया।

कहा कि इन संस्थानों में संगीत, पत्र-पत्रिकाओं के अलावा योग, ध्यान, चिंतन और मनोरंजन की अन्य सुविधाओं के प्रबंध होने चाहिए। आउटडोर गतिविधियों के अवसरों सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम होने चाहिए। कहा कि ढली स्थित दृष्टिबाधित, मूक और बधिर संस्थान के बच्चों के लिए रोजगारोन्मुखी आधुनिक व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स शुरू होने चाहिए।

आम नागरिक की तरह मशोबरा और ढली गए राज्यपाल

मशोबरा के नारी सेवा सदन और ढली के मूक-बधिर एवं दृष्टिहीन बच्चों के विशेष स्कूल में राज्यपाल का औचक निरीक्षण गोपनीय रखा गया था। राज्यपाल के साथ पायलट गाड़ी नहीं गई। न ही सुरक्षा ज्यादा थी। राज्यपाल एक बार हल्के यातायात जाम में भी फंसे।

इस बीच सड़क खाली करने को सायरन नहीं बजाया गया। वे नौ बजे निकले। उनके साथ उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, दो एडीसी संदीप भारद्वाज, योगेश और सचिव पुष्पेंद्र राजपूत थे। राज्यपाल आम नागरिक की तरह गए।
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राज्यपाल ने जताई नाराजगी

साढे़ नौ बजे मशोबरा के नारी सेवा सदन पहुंचे। सारे स्टाफ के पसीने छूट गए। उन्होंने इस सदन में 32 महिलाओं में से 28 मनोरोगियों से बातचीत की। सबको एक कमरे में बैठाया और एक-एक से हाल पूछा। एक महिला ने बताया कि सुबह वे नाश्ते में परांठे और चाय खुद बनाती हैं। दिन में दाल-चावल ही दिया जाता है।

रात को रोटी और सब्जी दी जाती है। कभी-कभी रात को दही मिलता है। चार बजे सायं चाय में बिस्कुट नहीं मिलता। इस पर राज्यपाल ने नाराजगी जताई। इसके बाद वे ढली गए। कई अन्य शिकायतों पर भी राज्यपाल ने कड़ा नोटिस लिया। वह ढाई घंटे तक निरीक्षण करने के बाद लौटे।
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