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मिले सबूत, गिरफ्तार हो सकते हैं हिमाचल के कई बड़े अफसर

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रेणुका बांध भूमि के अधिग्रहण मामले में सीनियर आईएएस समेत कई अफसर विजिलेंस जांच के लपेटे में आ गए हैं। जांच में कई सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। आरोपी अफसरों के खिलाफ काफी साक्ष्य एकत्रित किए जा चुके हैं। एक के बाद एक खुल रही परत से विजिलेंस मुख्यालय में इस मामले पर समीक्षा बैठक की जा रही है।
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इसके बाद इस केस में संलिप्त रहे आरोपियों की गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। गोलमाल में एक नायाब तहसीलदार का नाम भी सामने आया है। इनमें से जीएम स्तर का अफसर रिटायर भी हो चुका है। मामले में एक वरिष्ठ आईएएस अफसर भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। यह अफसर मौजूदा समय में केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव रैंक पर तैनात है।
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जांच में पाई गई गड़बड़ी

विजिलेंस जांच में साफ हो गया है कि रेणुका बांध के लिए खरीदी गई भूमि में अनियमितताएं हुई हैं। मामले में प्रदेश पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड एवं राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। जांच में सामने आया है कि बांध के लिए अधिग्रहण की गई कई बीघा भूमि सिरमौर से बाहर रहने वालों की भी निकली है।

यहां गोलमाल यह है कि बाहरी राज्यों से आकर कुछ लोगों ने पहले भूमि खरीदी और बाद में छह माह के भीतर उसके आगे कई गुणा दामों में बेच दिया है। एडीजीपी विजिलेंस पृथ्वी राज ने कहा कि हर पहलू पर जांच चल रही है।

यह है मामला
मुख्यमंत्री के रेणुका प्रवास के दौरान 12 नवंबर 2013 को यह मामला कुछ स्थानीय लोगों की ओर से उनके ध्यान में लाया गया था। भूमि अधिग्रहण व खरीदने के मामले में हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन पर गंभीर आरोप लगाए गए। इस पर मुख्यमंत्री ने जिलाधीश सिरमौर को जांच के आदेश दिए। जांच अतिरिक्त जिलाधीश सिरमौर की तरफ से की गई। इसके बाद यह मामला विजिलेंस के सपुर्द कर दिया गया।
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