शिमला। आईजीएमसी से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों को भेजने के फैसले पर सेमडिकोट भड़क गई है। सेमडिकोट का कहना है कि जब प्रदेश में अन्य मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं तो सरकार अलग से भर्ती निकालकर नियमित डॉक्टरों की तैनाती कर सकती है। आईजीएमसी सेमडिकोट के अध्यक्ष डॉ. राजेश सूद ने कहा कि सरकार केवल आईजीएमसी से अन्य मेडिकल कॉलेजों में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर भेजकर महज राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रही है।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में हाल ही में सर्दियों के अवकाश से डॉक्टर लौटे हैं। लेकिन अब डॉक्टरों को दूसरे मेडिकल कॉलेजाें में भेजा गया है। सेमडिकोट का कहना है कि सालों में सरकार एक बार पोस्ट निकालती है, तो ऐसे में सभी डॉक्टर नहीं भर पाते हैं। अगर रुटीन में पद निकालकर भरे जाएंगे तो समस्या हल हो जाएगी।
दरअसल सोमवार को इलाज करवाने आने वाले मरीज परेशान हो सकते है। चूंकि, मेडिसन, जनरल सर्जरी, बालरोग व गायनी विभाग समेत कुछ मुख्य विभागों के डॉक्टरों को यहां भेजा गया है। लेकिन यह कब तक आएंगे, इसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अस्पताल में रोजाना तीन हजार से अधिक की ओपीडी अस्पताल में होती है तो ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए कम डॉक्टरों के होने के कारण घंटों इंतजार करने को मजबूर होना पड़ सकता है।