मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बातचीत करते एसएमसी शिक्षक।
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को एसएमसी शिक्षकों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनकी उचित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। एसएमसी शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने संगीता राजपूत की अध्यक्षता में रविवार को ओक ओवर शिमला में मुख्यमंत्री से भेंट की और उन्हें अपनी विभिन्न मांगों से अवगत करवाया।
इन शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से इसी बजट में उनकी समस्याओं का निराकरण करने की मांग की। बताया कि उनकी नियुक्तियां 11 साल पहले शुरू हो गई थीं। वे उस वक्त से शोषित हो रहे हैं। एमएमसी के तहत लगे सभी 2,555 शिक्षक एनसीटीई और आरटीई के नियमों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता की पात्रता को पूरा करते हैं। इनकी नियुक्तियां भी एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटियों ने की हैं, जिसके लिए आरएंडपी नियमों की पूरी तरह से अनुपालना की गई है।
पीटीए शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को जहां सात साल बाद शुरू किया गया था, वहीं एसएमसी शिक्षकों के लिए इसे नियुक्ति के 10 से 11 साल बीत जाने पर भी शुरू नहीं किया जा सका है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र यानी प्रतिज्ञा पत्र में भी इस घोषणा को शामिल किया है कि सत्ता में आने पर एसएमसी शिक्षकों को नियमित किया जाएगा। इन शिक्षकों ने कहा कि अब सरकार का वादा पूरा करने का समय आ चुका है।
मुख्यमंत्री इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उचित दिशा-निर्देश जारी करें। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनकी उचित मांगाें पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
नियमितीकरण की प्रक्रिया के साथ तबादला नीति और मानदेय बढ़ाने की भी मांग
इन शिक्षकों ने मांग की कि उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया को शुरू करने के साथ उनकी तबादला नीति और मानदेय बढ़ाने पर भी सरकार विचार करे। यह शिक्षक इतने वर्षों से 10 हजार और 14 हजार रुपये मासिक मानदेय के साथ बच्चों को पढ़ा रहे हैं। दूरदराज क्षेत्रों में नियुक्तियां होने के कारण कई शिक्षक अपने परिवार से भी एक दशक से दूर हैं। मानवीय दृष्टिकोण से यह मामले देखे जाने चाहिए।