गिरि नदी पर बनने वाले बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर पर खर्च लाखों रुपये बर्बाद हो गए हैं। जलशक्ति महकमे ने पिछली सरकार के वक्त के इस प्रस्ताव को बदल दिया है। शिमला के लिए पेयजल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए गिरि नदी पर छोटे बांध बनाए जाने थे। मगर अगले साल सतलुज का पानी शिमला शहर के लिए पहुंचाने का तर्क देकर यह पुराना फैसला बदल दिया गया है। शिमला के लिए सबसे ज्यादा पानी गिरि नदी से उठाया जाता है।
इससे शहर की एक बड़ी जनसंख्या को पीने का पानी मिलता है। गर्मियों में कई बार नदी में भी पानी कम हो जाता है। ऐसे में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह तय हुआ था कि गिरि नदी में छोटे-छोटे चेक डैम या बांध बनाए जाने चाहिए। इनमें छोटे बांध की तर्ज पर एक बड़ा चेक डैम बनाने का भी प्रस्ताव था। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं ली गईं। इस पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए।
इसका काम शुरू होने वाला था कि तब तक सरकार बदल गई। भाजपा सरकार ने भी इस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया। अब दोबारा आई कांग्रेस सरकार का जलशक्ति महकमा इस बारे में फिर से उदासीन हो गया है। इस परियोजना को सिरे लगाने के निर्णय पर पीछे हट गया है। योजना न बनने से ठियोग और चौपाल क्षेत्र के लोगों में भी निराशा है।
कोल डैम से पानी लिफ्ट होने से बदला फैसला
एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि चूंकि अगले साल तक शिमला के लिए सतलुज पर बने कोल डैम से पेयजल पहुंचाने की योजना को धरातल पर उतारा जाना है। ऐसे में अब गिरि पर बांध बनाने का कोई मतलब नहीं है। हालांकि जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता संजीव कौल का कहना है कि इस बारे में शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड का प्रबंधन ही कुछ बता सकता है।
तत्कालीन मंत्री स्टोक्स ने बनाई थी योजना
पिछली वीरभद्र सरकार की तत्कालीन सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स चाहती थीं कि यह योजना सिरे लगे। इसके कई लाभ होने थे। एक तो गिरि नदी में पानी का रिचार्ज होना था। इससे उनके ठियोग हलके की उठाऊ पेयजल और सिंचाई योजनाओं को भी लाभ होना था। शिमला शहर के लिए गिरि नदी से पेयजल की निर्बाध आपूर्ति तो होनी ही थी। अब उनकी योजना पर भी पानी फिर गया है।