हिमाचल में मौसम का मिजाज लगातार बदलता जा रहा है। बीते सालों के मुकाबले साल 2016 के मार्च महीने में ज्यादा ठंड पड़ रही है। पहाड़ों की रानी शिमला में ही मार्च माह के अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट आ रही है। इस बार मार्च में 2.0 डिग्री न्यूनतम तापमान रिकार्ड किया गया।
बारिश का सिलसिला भी साल दर साल लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार मार्च में अभी तक औसत से 59 फीसदी ज्यादा बारिश हो चुकी है। होली पर हिमाचल में दोबारा मौसम खराब होने का पूर्वानुमान है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि 24 मार्च से दोबारा हिमाचल में ठंड बढ़ेगी।
साल 2010 में मार्च महीने में 4.5 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। साल 2011 में 37.6, 2012 में 35.8, 2013 में 99, 2014 में 142.5 और साल 2015 में 196.4 मिलीमीटर बारिश शिमला में हुई। साल 2016 में 20 मार्च तक 102.2 मिमी बारिश हो चुकी है। न्यूनतम तापमान मार्च 2010 में 6.3 डिग्री सेल्सियस रहा।
2011 में 3.9, 2012 में 1.6, 2013 में 4.0, 2014 में 1.0, 2015 में 2.8 और 2016 में 14 मार्च को 2.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया है। अधिकतम तापमान भी कम हुआ है। साल 2010 से 2012 तक 25 डिग्री सेल्सियस, 2013 में 21.8, 2014 में 23, 2015 में 24 और 2016 में 20 डिग्री सेल्सियस रहा।
सटीक नहीं बैठ रहा मौसम का पूर्वानुमान- हिमाचल में मौसम का पूर्वानुमान लगाने के लिए मौसम विज्ञान केंद्र के पास कोई यंत्र नहीं है। नई दिल्ली और पटियाला में स्थापित यंत्रों के माध्यम से ही यहां का पूर्वानुमान लगाया जाता है। राजधानी शिमला की सबसे ऊंची चोटी जाखू में मौसम विभाग की डॉप्लर वैदर राडार लगाने की योजना है। इस यंत्र के लगने से सूबे में मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाना संभव हो सकेगा।
पहाड़ों पर बदल रहा बर्फबारी का ट्रेंड- बीते दस सालों से राजधानी में बर्फ बारी लगातार कम हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग के असर के चलते मौसम में यह बदलाव आ रहा है। पहाड़ों में बर्फबारी का ट्रेंड भी बदल रहा है। अब दिसंबर के बजाए फरवरी-मार्च में ज्यादा बर्फबारी हो रही है। साल 2000 से लेकर 2015 तक दिसंबर महीने में 13 दिन बर्फबारी रिकार्ड हुई।
जबकि इस अवधि के दौरान फरवरी में 44 दिन और मार्च में 15 दिन बर्फबारी हुई। साल 2013-14 से मार्च महीने में 7 बार बर्फबारी हुई, जबकि दिसंबर महीने में छह बार। 90 के दशक में जहां कुल बर्फ 130 से लेकर 262 सेंटीमीटर तक रिकार्ड की गई। साल 2000 के बाद 120 सेंटीमीटर से अधिक बर्फ नहीं गिरी है। अधिकतम तापमान में हो रही वृद्धि के चलते बर्फबारी में कमी दर्ज की जा रही है। अंधाधुंध भवन निर्माण, बढ़ता प्रदूषण और पेड़ कटान इसके लिए जिम्मेवार हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक डा. मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ सालों से मार्च महीने में ज्यादा बारिश हो रही है। साल 2007 के बाद से मार्च में लगातार अधिक बारिश हो रही है। ग्लोबल वार्मिंग इसका कारण हो सकता है। पहाड़ों में बर्फबारी होने का ट्रेंड भी बदल रहा है।