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ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट: आगाज अच्छा, अंजाम देना चुनौतीपूर्ण, जानिए वजह

Fri, 08 Nov 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh राकेश भट्ट, अमर उजाला, धर्मशाला
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पीएम मोदी व सीएम जयराम - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल की पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का मेगा शो भले ही हिट रहा हो, लेकिन 92 हजार करोड़ रुपये के एमओयू वाले निवेश को धरातल पर उतारना प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगा।

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मंच से अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्मशाला व पहाड़ों में निवेश की बात बेशक की, सुनने में अटपटा बताया हो, लेकिन उनके यहां निवेश की अपार संभावनाएं गिनाने के बाद सरकार पर शत-प्रतिशत निवेश को धरातल पर उतारने का दबाव बढ़ गया है।

एक साल पहले इन्वेस्टर्स मीट का बीड़ा प्रदेश की जयराम सरकार के उठाने के बाद से कितना निवेश होगा, इसको लेकर चर्चा शुरू होगी। लक्ष्य करीब 85 हजार करोड़ का तय किया था, लेकिन लक्ष्य से अधिक 92 हजार करोड़ रुपये के एमओयू साइन हो गए।
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विपक्ष के इसे मौज-मस्ती की मीट बताने के बीच भाजपा के ही हमीरपुर से सांसद व केंद्रीय कॉरपोरेट एवं वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कह दिया कि एमओयू साइन करने वाले निवेशक हिमाचल में शत-प्रतिशत निवेश करें यह सुनिश्चित करना चाहिए।


 

पीएम मोदी ने सरकार को दिए ये निर्देश

- फोटो : सोशल मीडिया
इसी बीच प्रदेश के उद्योग मंत्री ने अनुराग को इन्वेस्टर्स मीट संबंधी बैठकों में न बुलाने पर इसे भूल बताया। इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री जयराम ने कहा कि कहीं पर भी शत-प्रतिशत निवेश नहीं होता। ज्ञात हो कि सप्ताह पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने गए हिमाचल के मुख्य सचिव को 15 मिनट मिलने का ही वक्त मिला था, लेकिन करीब 45 मिनट तक मोदी ने निवेश के लिए तैयार किए गए प्रदेश सरकार के रोड मैप को समझकर दिशा-निर्देश दिए।

साइन हो रहे एमओयू व असल में होने वाले निवेश पर चर्चा व आरोप-प्रत्यारोप के बीच मोदी ने यहां पर निवेश अकल्पनीय तो बताया, लेकिन साथ ही पावर, कृषि, बागवानी, टूरिज्म आदि में अपार संभावनाएं बताते हुए कहा कि जो माहौल यहां पर उद्यमियों को मिलेगा, वह कहीं नहीं मिल सकता है। ऐसे में शिखर की ओर हिमाचल टैग लाइन के साथ ग्लोबल इन्वेस्टर मीट 2019 के जरिये शिखर छूने का दबाव तो प्रदेश सरकार पर होगा ही लेकिन विपक्ष भी भविष्य की राजनीति का मुख्य बिंदु जमीन पर उतरने वाले निवेश की राशि व इस आयोजन के खर्च को रखेगा।
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मांग के अनुसार जमीन उपलब्ध कराना भी एक बड़ी चुनौती

- फोटो : सोशल मीडिया
सूत्रों की मानें तो लैंड बैंक से उद्यमियों को उनकी मांग के अनुसार जमीन उपलब्ध कराना भी एक बड़ी चुनौती है। इस इन्वेस्टर्स मीट में 600 से अधिक एमओयू साइन हुए हैं, जबकि जरूरत के अनुसार उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने की रूपरेखा को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। पर्यटन, उद्योग, टीसीपी, हिमुडा आदि विभागों ने अपने पास उपलब्ध भूमि का जो ब्योरा निवेशकों को उपलब्ध कराई जा रही जमीन को लेकर दिया उसे नाकाफी पाते हुए निजी क्षेत्र से प्लॉट देने के इच्छुक लोगों से स्वीकृति मांगी गई। अभी तक 350 से अधिक लोगों ने निवेशकों के लिए अपनी जमीन लीज पर देने की स्वीकृति दी, लेकिन बड़े साइज के प्लॉटों की संख्या काफी कम बताई जा रही है।

अभी तक अलग-अलग प्रदेशों की ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में स्वयं हाजिर रहने वाले उद्योग क्षेत्र के देश के बड़े चेहरे रतन टाटा, मुकेश अंबानी, आनंद महिंद्रा, कुमार मंगलम बिड़ला आदि यहां पर नहीं दिखे, जबकि यहां इन्वेस्टर्स मीट को लेकर बनी डॉक्यूमेंट्री में मुख्यमंत्री की इनसे हुई मुलाकात को दर्शाया गया। इसकी चर्चा यहां पर रही, लेकिन अमेजन, भारती व मारुति के चेयरमैन की उपस्थिति व यूएई की भागेदारी से भी उम्मीद को नकारा नहीं जा सकता। वहीं उद्योगपति पवन मुंजाल भी प्रधानमंत्री के संबोधन तक मौजूद नहीं थे, जबकि शाम को वह इन्वेस्टर्स मीट में पहुंच गए थे। शुक्रवार को भी वह इन्वेस्टर्स मीट में शामिल हो सकते हैं।  
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