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Himachal News: हिमाचल में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाला गिरोह सक्रिय, सीबीआई कोर्ट ने जारी किया सर्च वारंट

Fri, 16 May 2025 12:43 PM IST
Krishan Singh दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

सीबीआई को आशंका है कि फर्जी मार्क्सशीट बनाने वाला यह गिरोह राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार में भी काम कर रहा है।
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अपराध (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में डाक विभाग की ग्रामीण शाखाओं में फर्जी दस्तावेज पर नौकरी दिलाने वाला गिरोह सक्रिय है। यह गिरोह पैसे लेकर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करता है। बाद में नौकरी पाने के लिए युवा फर्जी प्रमाण-पत्र की जाली अंकतालिका प्रस्तुत कर आवेदन करते हैं। हाल ही में सीबीआई शिमला शाखा ने फर्जी मार्क्सशीट पकड़ी थी। इस मामले में आरोपियों में पूछताछ में यह खुलासा हुआ। सीबीआई को आशंका है कि फर्जी मार्क्सशीट बनाने वाला यह गिरोह राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार में भी काम कर रहा है। वर्ष 2019 से उब तक हिमाचल में 200 से ज्यादा फर्जी मार्क्सशीट के मामले सामने आ चुके हैं।केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शिमला की अदालत से हरियाणा के जिला चरखी दादरी निवासी आरोपी ओमवीर के निवास की तलाशी के लिए सर्च वारंट हासिल किया है। ब्यूरो ने आरोपी के खिलाफ सर्च वारंट के लिए सत्र न्यायालय आवेदन किया था। अब अदालत ने सीबीआई को 19 मई तक इसकी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।

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सीबीआई की शिमला शाखा में 31 मार्च 2025 को दर्ज केस के मुताबिक ओमवीर की नियुक्ति कुल्लू में ग्रामीण डाक सेवक, शाखा पोस्टमास्टर फोजल बीओ के रूप में वर्ष 2022 में हुई। इसी बीच जब ओमवीर की मार्क्सशीट को सत्यापन करवाया गया तो अवर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज की रिपोर्ट के अनुसार यह फर्जी पाई गई। इसके बाद 27 सितंबर 2023 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। उधर, सीबीआई की जांच में ओमवीर के मूल प्रमाण पत्रों और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान पता चला कि संबंधित निकाय द्वारा अंकतालिका कभी जारी नहीं की गई थी। पूरे प्रकरण में अज्ञात लोक सेवक की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
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200 से ज्यादा युवाओं के तैयार हुए है फर्जी प्रमाण-पत्र
डाक विभाग की ओर से साल 2019 सो अखिल भारतीय ऑनलाइन चयन प्रक्रिया के माध्यम से शाखा पोस्टमास्टर, सहायक शाखा पोस्टमास्टर और ग्रामीण डाक सेवकों के पदों के लिए भर्तियां प्रकाशित की जाती हैं। इसके तहत मैट्रिक के अंकों की मेरिट की वरीयता सूची के अनुसार युवाओं को चयनित किया जाता है। बीते कुछ वर्षों के दौरान हुई भर्तियों के तहत विभागीय पड़ताल में प्रदेश सहित बाहरी राज्यों के 200 से अधिक युवाओं के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। अब सीबीआई धीरे-धीरे इन मामलों की परतें खोल रही है।
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