हिमाचल में राजस्व अधिकारी अपनी मांगों को लेकर विरोध की राह पकड़ चल चुके हैं। संघ की राज्य इकाई के आह्वान पर जिला सोलन समेत बद्दी व नालागढ़ के पटवारी, कानूनगो व अन्य कर्मचारियों के बाद अब तहसीलदारों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
तहसीलदारों ने कहा कि अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो मजबूरन उन्हें उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
कसौली तहसीलदार और प्रदेशस अध्यक्ष नारायण चौधरी एवं जिला राजस्व अधिकारी संघ के संगठन सचिव एवं बद्दी के तहसीलदार केशव राम ने कहा कि सरकार ने तहसीलदारों का पदोन्न्नति कोटा 27 से घटा कर 25 फीसदी कर दिया है।
जबकि बीडीओं का कोटा बढ़ा दिया है। तहसीलदारों के पास वाहन की कोई सुविधा नहीं है। हालात यह हैं कि 1996 में दस तहसीलदारों को जो दस वाहन उपलब्ध करवाए गए थे उसमें से भी चार खराब हो चुके हैं।
संघ राजस्व के पद सृजित करने, रजिस्ट्रेशन फीस व फील्ड भत्ता बढ़ाने की भी मांग कर रहे है। इन मांगों को लेकर प्रदेश कार्यकारिणी के एक प्रतिनिधिमंडल परिवहन मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, आईपीएच मंत्री, मुख्य सचिव पी मित्रा व पीसी फारका से भी मिल चुका है।
पहले से निर्धारित कार्यक्रम के तहत 26 जुलाई से सभी तहसीलदार काले बिल्ले लगा कर कार्य करेंगे। 2 अगस्त से राजस्व अधिकारी सुबह दस बजे से सांय पांच बजे तक ही अपनी सेवाएं देंगे। जबकि 11 अगस्त से 19 तक पेन डाउन हड़ताल शुरू कर देंगे।
तहसीलदार केशव राम व कुंदन सिंह लालटा ने कहा कि अगर उनकी मांगों को ओर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इससे जिला सोलन में बद्दी तहसील समेत करीब 37 पटवार सर्कलों पर तालाबंदी की नौबत आ गई है। बीबीएन में आधा दर्जन पटवार सर्कलों मे ताले लगे होने से लोगों को राजस्व से जुड़े कार्य कराने में दिक्कत हो रही है।
बद्दी के तहत बरोटीवाला, मधाला, बुआसनी, नालका, भुड्ड व केंडोल पटवार सर्कलों में पटवारी के पद लंबे समय से खाली है। यहां पर पिछले एक साल से प्रतिनियुक्ति पर पटवारी गए थे लेकिन सरकार की नई अधिसूचना के चलते पटवारियों ने अतिरिक्त कार्यभार संभालने से इंकार कर दिया।