शिमला के लहसुन की चेन्नई मंडी में है सबसे अधिक मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। जुन्गा तहसील के निचले क्षेत्रों की पंचायतों में इन दिनों लहसुन निकालने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। काफी किसानों ने लहसुन को प्रदेश की सबसे बड़ी मंडी सोलन के अतिरिक्त देश की विभिन्न मंडियों में भेजना शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र में उत्पादित किए जाने लहसुन की सबसे अधिक मांग देश की सबसे बड़ी लहसुन मंडी चेन्नई में है।
सबसे अहम बात यह है कि बीते वर्ष की तुलना में किसानों को इस वर्ष लहसुन का रेट काफी अच्छा मिल रहा है। सोलन सब्जी मंडी में लहसुन 60 रुपये से लेकर 150 रुपये थोक में बिका।
लहसुन की फसल करीब 15 दिन पहले तैयार हो चुकी थी लेकिन लगातार बारिश से निकालने का कार्य बाधित हो रहा था। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष असमय बारिश होने से करीब 20 प्रतिशत फसल खराब हुई है। प्रगतिशील किसान दौलत राम मेहता, जबर सिंह ठाकुर, चंचल वर्मा और हरीश ठाकुर सहित अनेक किसानोें ने बताया कि बारिश होने से खेतों में नमी के कारण लहसुन का रंग काला पड़ गया और साइज भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं बन पाया है। कई स्थानों पर लहसुन में रोग लगने से भी फसल काफी खराब हुई है।
सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र की तर्ज पर जुन्गा के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। लहसुन का निर्यात अन्य देशों के लिए भी किया जाता है। लहसुन का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में भी होता है।
137 हेक्टेयर क्षेत्र में होता है लहसुन
कृषि विभाग के अनुसार शिमला जिला के निचले क्षेत्रों में करीब 137 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की खेती होती है। इसमें करीब 1406 मिट्रिक टन लहसुन का उत्पादन होता है। जिले में लहसुन का उत्पादन केवल चार ब्लॉक मशोबरा, बसंतपुर, रामपुर और चौपाल के नेरवा क्षेत्र में किया जाता है। इसमें लहसुन की पार्वती किस्म उगाई जाती है।