हिमाचल प्रदेश के आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए अच्छी खबर है। इन दोनों ही मेडिकल कॉलेज में आने वाले हर मरीज को फ्री में जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसको लेकर स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से एक प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही सरकार को सौंपा जाएगा। प्लान पर सरकार की ओर से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद मरीजों को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जानी शुरू कर दी जाएंगी।
इस सिलसिले में प्रदेश के दो डाक्टरों को दिल्ली स्थित आल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट (एम्स) और हरियाणा के मॉडल को अध्ययन करने के लिए 15 दिन पहले ही भेजा गया था। ये दोनों डाक्टर अध्ययन करके वापस आ चुके हैं।
फ्री दवाइयों के लिए प्लान तैयार
इनकी ओर से रिपोर्ट और प्लान तैयार किया जा रहा है। संभव है कि मई के आखिर तक पूरा प्लान सरकार को जमा कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य निदेशक डा. आरके शर्मा ने बताया कि हिमाचल के दोनों मेडिकल कॉलेजों में आने वाले हर मरीज को फ्री में जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाए। इसको लेकर एक केंद्र स्थापित किया जाएगा।
इसको लेकर पूरा वर्क आउट किया जा रहा है कि इसे कैसे क्रियान्वित किया जाएगा, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न होने पाए। इसीलिए एम्स के पैटन का अध्ययन किया गया।
हिमाचल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों में कमोवेश एक जैसी स्थिति हैं। मरीजों को चुनिंदा दवाएं तो मिल पाती हैं, लेकिन ज्यादातर दवाओं को आज भी मेडिकल स्टोरों से खरीदना पड़ता है। यूं कहे कि मरीजों को हर तरह की दवाएं किसी स्तर पर अभी तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
कई राज्यों में फ्री दी जा रही जेनेरिक दवाएं
राजस्थान, छत्तीसगढ़ में फ्री में जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उत्तराखंड और हरियाणा सामान्य दवाएं निशुल्क दी जाती है। उत्तराखंड में जेनेरिक दवाएं सरकारी अस्पतालों में सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
इन राज्यों में बाहर की दवाएं नहीं लिखने का साफ तौर पर निर्देश जारी हैं। कई राज्यों में तो गरीब मरीजों को महंगी दवाएं भी लोकल स्तर पर खरीदकर फ्री में दी जाती हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी का कहना है कि प्रदेश के दोनों सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अगर फ्री में जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयोग सफल रहा तो इसे प्राथमिक , सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों तक में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।