कांगड़ा जिले के देहरा स्थित एक निजी बीएड कॉलेज के संचालक और उसके परिवार के चार सदस्यों को सीबीआई की विशेष अदालत ने दो-दो साल कैद की सजा सुनाई है।
कॉलेज संचालक पर फर्जी शैक्षणिक डिग्रियों के कारोबार का आरोप था, जो कि अदालत में साबित हुए हैं। आरोप है कि फर्जी डिग्रियों के आधार पर उन्होंने अपने तीन भाईयों और एक बहन को सरकारी नौकरियों में लगवाया था।
सीबीआई के एसपी डॉ. अरमानदीप सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अदालत ने मामले में सभी आरोपियों को दो दो साल की सजा सुनाई है।
‘अमर उजाला’ ने धर्मशाला से सारे परिवार की डिग्रियां फर्जी शीर्षक खबर से मामले को ब्रेक करने के बाद सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित की थीं। इसके आधार पर शिक्षा विभाग ने चारों आरोपी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।
इनमें तीन शिक्षा विभाग में प्राध्यापक थे, जबकि एक शिक्षा बोर्ड में कार्यरत था। मामले की विजिलेंस जांच से असंतुष्ट होने पर हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई के सुपुर्द की थी।
इस आधार पर संस्थान संचालक को नौ महीने तक सीबीआई ने अपनी हिरासत में रखा। बीते दो दिसंबर को इस केस में सभी आरोपियों को दो-दो वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई है।
इस हाई प्रोफाइल फर्जीवाड़े के तार बिहार स्थित एक यूनिवर्सिटी से भी जुडे़ हुए हैं। सीबीआई ने इस केस में बिहार के एक मास्टरमाइंड दिनेश यादव को भी गिरफ्तार किया था।
यह मामला तब उठा, जब आरोपी की एक बहन ने बिहार स्थित बोध गया यूनिवर्सिटी के नाम पर प्रभाकर की डिग्री प्रदर्शित कर हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली, जबकि जांच में साबित हुआ कि बोध गया यूनिवर्सिटी प्रभाकर का कोर्स ही नहीं कराती।