एक किमी लंबा बना रहा फ्लाईओवर, पिलर का 50 फीसदी कार्य पूरा
2026 तक पूरा होगा निर्माण कार्य, लोगों की होगी सुविधा
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कैथलीघाट-शिमला फोरलेन का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। शोघी के पास 700 मीटर लंबी सुरंग का कार्य शुरू हो गया है। इसके साथ ही एक किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने फ्लाईओवर के निर्माण के लिए पिलर के निर्माण का करीब 50 फीसदी कार्य पूरा कर लिया है। सुरंग के निर्माण के लिए शोघी के पास पहाड़ की स्थिरीकरण का कार्य किया जा रहा है। एनएचएआई ने कंपनियों को साल 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया है।
कैथलीघाट-ढली फोरलेन शिमला को बाइपास से जोड़ेगा। इससे कैथलीघाट और ढली के बीच की दूरी करीब 40 किलोमीटर से कम होकर 28.5 किमी रह जाएगी। करीब 3,914 करोड़ की परियोजना में फोरलेन का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में कैथलीघाट से शकराल तक 1844 करोड़ की लागत से 17.5 किलोमीटर फोरलेन का निर्माण किया जा रहा है। इसमें 20 पुल, दो टनल, एक अंडरपास, 53 क्लवर्ट, एक प्रमुख जंक्शन, दो अल्प जंक्शन, एक टोल प्लाजा बनाने का कार्य चला हुआ है।
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शकराला से ढली-मशोबरा जंक्शन तक 2070 करोड़ से बनेगा 11 किलोमीटर फोरलेन
दूसरे चरण में शकराला से ढली-मशोबरा जंक्शन तक 11 किलोमीटर फोरलेन का निर्माण 2070 करोड़ रुपये से किया जाएगा। इसमें तीन सुरंगें और सात पुल बनेंगे। एक 300 करोड़ रुपये की लागत से जमीन से 240 मीटर ऊपर करीब 580 मीटर विश्वस्तरीय केबल ब्रिज का निर्माण होगा। फोरलेन के बनने से शिमला में विकराल हो रही जाम की समस्या से निजात मिलेगी। इसके अलावा सेब सीजन में बागवानों के लिए फोरलेन संजीवनी साबित होगा। शिमला से चंडीगढ़ तक दो घंटे कम समय लगेगा।
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फोरलेन का 20 फीसदी कार्य पूरा : दहिया
कैथलीघाट से ढली तक फोरलेन का 20 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है। शोघी के पास पुल के पिलर बना दिए गए हैं और टनल के निर्माण के लिए खोदाई की जा रही है। कंपनियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
- आनंद कुमार दहिया, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
स्थानीय लोग बोले, अवैध डंपिंग पर हो कार्रवाई
निर्माण कार्य से लोगों की जमीनें और घास धूल से भर गई है। इसके अलावा निर्माण कार्य से निकले मलबे की उनकी जमीन में अवैध डंपिंग की जा रही है। स्थानीय लोग उपायुक्त को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन, समस्या ज्यों कि त्यों है। रमेश, मोहन, सोहन, सुरेश, प्रणव और अंकित ने प्रशासन से आग्रह किया कि ठेकेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।