उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि द्रंग क्षेत्र के स्कूलों के लिए भेजे गए प्राचार्यों के नामों में भी बदलाव कर दिए गए, इससे स्थानीय जरूरतों की अनदेखी हुई। बांधी के बजाए एक प्राचार्य को काजा के किब्बर भेज दिया गया। क्षेत्र के कई स्कूलों में अभी भी शिक्षकों की कमी है और पदोन्नत शिक्षकों को बाहर भेज दिया गया है। लोग समस्याएं लेकर जब उनके पास आते हैं, तो उन्हें केवल पत्र लिखने तक सीमित रहना पड़ता है। पूर्व मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है।