हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहौल में ‘बेटी है अनमोल’ का नारा बुलंद करते हुए एक गांव ने सदियों पुरानी परंपरा को चुनौती दी है। लाहौल के प्यूकर गांव में एक परिवार ने बेटी की जन्म पर पूरे गांव को गोची उत्सव का निमंत्रण भेजा है।
23 जनवरी को आयोजित होने वाली इस उत्सव की तैयारियों में परिवार समेत पूरा गांव जुटा हुआ है। गौर हो कि घाटी में अभी तक केवल लड़कों के जन्म पर ही गोची उत्सव मनाने की परंपरा है, लेकिन इस बार केलांग के वामतट पर बसे प्यूकर गांव में बिटिया के जन्म पर यह उत्सव मनाया जाएगा।
इन दिनों भारी बर्फबारी के कारण दुनिया से कटे लाहौल घाटी के प्यूकर गांव ने अपनी इस पहल से पूरे देश को बेटी है अनमोल का संदेश दिया है। गोची उत्सव पर एक परिवार पूरे गांव को पारंपरिक व्यंजनों की धाम परोसेगा।
पिता के साथ खड़ा हुआ गांव, मां नहीं ले पाएगी हिस्सा
इस दौरान पुजारी गांव के मुख्य देवता तंगजर की विशेष पूजा अर्चना के साथ बच्ची की बेहतर भविष्य के लिए कामना करेंगे। तीन माह की बच्ची सोनम डोलमा के पिता सोनम वंग्याल और माता तंजिन दोनों ही बैंक अधिकारी हैं। वंग्याल कहते हैं कि आज जमाना बदल चुका है।
लड़कियां अपनी मेहनत और हौसले के बलबूते नई बुलंदियों को छू रही हैं। लिहाजा बेटा-बेटी में भेदभाव करना दकियानूसी विचार है। बेटी के जन्म पर गोची उत्सव का आयोजन कर परिवार के साथ पूरा गांव फक्र महसूस कर रहा है।
डोलमा की मां तंजिन ने कहा कि वह घाटी से बाहर कुल्लू में तैनात है। लिहाजा वह इस उत्सव में शरीक नहीं हो पाएंगी, लेकिन वह चाहती हैं कि बेटी के जन्म पर घाटी के हर गांव में गोची उत्सव मनाया जाए। इधर, उपायुक्त लाहौल स्पीति विवेक भाटिया ने कहा कि प्यूकर गांव में बेटी की जन्म पर इस तरह की पहल समाज के लिए सराहनीय है।
आप भी जानिए क्या है गोची उत्सव
घाटी में लड़कों के जन्म पर गोची उत्सव मनाने की परंपरा है। बेटे के जन्म पर परिवार पूरे गांव को गोची उत्सव पर धाम के लिए निमंत्रण भेजता है। जबकि बच्चे के खुशहाल भविष्य के लिए बौद्घ धर्म अनुसार विशेष पूजा अर्चना की जाती है।
देश में लिंग अनुपात में दूसरे नंबर पर है लाहौल-स्पीति
देश में लाहौल लिंग अनुपात में दूसरे नंबर पर है। यहां पर 1000 लड़कों के पीछे 1032 लड़कियां का लिंग अनुपात है। लाहौल में आज तक स्थानीय लोगों की ओर से कन्या भ्रूण हत्या का मामला सामने नहीं आया है।