देवभूमि हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। वर्ष 2022 की बात करें तो सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में साइबर अपराध के दर्जनों मामले सामने आए। इस अवधि में साइबर थाना शिमला में अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ 29 जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार हिमाचल में अब तक साइबर अपराधियों ने लोगों से 20 करोड़ 98 लाख की ठगी का प्रयास किया है। शिकायतकर्ता पीड़ितों को 67 लाख 75 हजार की राशि वापस दिलवाई गई।
साइबर ठगी के विभिन्न मामलों में एक करोड़ 85 लाख से ज्यादा की राशि को होल्ड किया गया है। वहीं, साइबर पुलिस ने 10 हजार से पांच लाख रुपये तक की ठगी के मामले संबंधित पुलिस थानों सौंप दिए हैं। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2017 से लेकर अब तक साइबर अपराधियों के खिलाफ 9,110 शिकायतें दर्ज की गईं। साइबर पुलिस ने साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों को दर्ज करवाने के लिए 1930 टोल फ्री नंबर जारी किया है। एसपी साइबर रोहित मालपानी ने बताया कि साइबर अपराध को लेकर लोगों को लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को ओटीपी शेयर न करने की सलाह दी जा रही है।
किस महीने में कितनी जीरो एफआईआर
सितंबर 13
अक्तूबर 8
नवंबर 8
दिसंबर 0
क्या है जीरो एफआईआर
जीरो एफआईआर उसे कहते हैं, जब कोई उसके विरुद्ध हुए संज्ञेय अपराध के बारे में घटनास्थल से बाहर के पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाए। इसमें घटना की अपराध संख्या दर्ज नहीं की जाती। हमारे देश की न्याय व्यवस्था के अनुसार, संज्ञेय अपराध होने की दशा में घटना की एफआईआर किसी भी जिले में दर्ज कराई जा सकती है। चूंकि यह मुकदमा घटना वाले स्थान पर दर्ज नहीं होता, इसलिए तत्काल इसका नंबर नहीं दिया जाता, लेकिन जब उसे घटना वाले स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है, तब अपराध संख्या दर्ज कर ली जाती है। जीरो एफआईआर के पीछे सोच यह थी कि किसी भी थाने में शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू की जाए और सबूत एकत्र किए जाएं। शिकायत दर्ज नहीं होने की स्थिति में सबूत नष्ट होने का खतरा होता है। जीरो एफआईआर हो या सामान्य एफआईआर, दर्ज की गई शिकायत को सुनकर/ पढ़कर उस पर शिकायती का हस्ताक्षर करना अनिवार्य कानूनी प्रावधान है।