महज 17 साल की उम्र में इंद्रजीत ने अपना पहला वीडियो एलबम ‘दिल का क्या कसूर’ बिना किसी की मदद से 2010 मे लांच किया, जिसमें 10 गीत गाए। इसे इंद्रजीत ने खुद लिखा और कंपोज किया था।
बचपन के शौक ने हिमाचल के प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत को खासी पहचान दिला दी है। वह कुल्लू जिले के दोगरी गांव के रहने वाले हैं। अब तक दर्जनों गीत स्वयं बना चुके हैं। इसके लिए उनको मिलियन व्यूज मिले हैं। यू-ट्यूब और सोशल मीडिया में लोगों ने उनके लोकगीतों को खूब पसंद किया है।
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महज 17 साल की उम्र में इंद्रजीत ने अपना पहला वीडियो एलबम ‘दिल का क्या कसूर’ बिना किसी की मदद से 2010 मे लांच किया, जिसमें 10 गीत गाए। इसे इंद्रजीत ने खुद लिखा और कंपोज किया था। इंद्रजीत ने हिमाचल संस्कृति के महत्व को देखते हुए हिमाचल के नाम एक से एक गाने लाए, जिन्होंने यू-ट्यूब व सोशल मीडिया पर धूम मचा दी।
इंद्रगीत की ओर से गाए गए लोकगीतों में लाड़ी शाऊंणी भाग-1 में 1.16 करोड़, बुधुआ मामा में 87 लाख, पाखली माणु 70 लाख, लाड़ी शाऊंणी भाग-2 में 68 लाख, मीठा बड़ा लगदा 60 लाख और हे मामा लोकगीत पर 60 लाख व्यूज यू-ट्यूब पर मिल हैं। वहीं हाड़े मेरे मामुआ में 23 लाख, सोलमा में 60 लाख, हिमाचल शोभला 12 लाख, तू एजी घरठे 33 लाख, फुला देई में 35 लाख और शाऊंणी भाग-3 में 28 लाख तक व्यूज मिले हैं।
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नशे पर बनाया था गीत, पुलिस ने किया सम्मानित
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने भी नशे को लेकर जागरूक करने के लिए गीत बनाने के लिए इंद्रजीत से अपील की थी। इंद्रजीत ने गीत को तैयार किया। इस गीत का विमोचन प्रदेश के पूर्व राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया था। इसके बाद प्रदेश पुलिस ने इंद्रजीत को प्रशंसनीय पत्र से सम्मानित किया है।