वन्य जीव अभयारण्य कर्मियों की ओर से हनीप्रीत के खानपान और सेहत का पूरा ख्याल रखा जाता है। डॉक्टर की सलाह के अनुरूप रोजाना साढ़े चार बजे करीब साढ़े तीन किलो मीट अथवा चिकन दिया जाता है। अन्य तेंदुओं को भी उम्र के हिसाब से मांस परोसा जाता है। वनमंडलाधिकारी वन क्षेत्र एवं वन्य जीव कुफरी शिमला राजेश शर्मा के मुताबिक समय-समय पर हनीप्रीत सहित सभी जीवों की स्वास्थ्य जांच यहां तैनात चिकित्सक करते हैं।
डेरा सच्चा सौदा प्रकरण के बाद रेस्क्यू की थी मादा तेंदुआ
हनीप्रीत के नामकरण को लेकर पर्यटकों और स्थानीय लोगों में इस बारे में जानने की उत्सुकता रहती हैं। पिछले कई सालों से कुफरी चिड़ियाघर में जानवरों और पक्षियों की देखरेख करने वाली महिला कर्मी कांता देवी ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान एक वनकर्मी ने ही इसे हनीप्रीत नाम दिया है जो बाद में काफी प्रचलित हो गया। इसी दौरान देश के बहुचर्चित डेरा सच्चा सौदा मामले में हनीप्रीत सुर्खियों में थी। हालांकि, यह एक इत्तफाक था। लेकिन, अधिकतर लोग अभी भी मादा तेंदुआ के नाम को इसी घटना से जोड़कर देखते हैं।