अंदर जाकर मेहर बेटी को उठाकर बाहर आ ही रहा था कि सिलेंडर फट गया। पूरा मकान आग की चपेट में आ गया। मकान की दीवारें लकड़ी की थी। आग के कारण दीवारें छत का बोझ नहीं उठा सकीं।
एक दीवार पिता और बेटी पर भरभराकर गिर गई। इसके बाद इन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। दोनों जिंदा आग में जल गए। लोगों ने मौके पर पहुंचकर दोनों को बचाने की कोशिश की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
मेहर चंद का बेटा और बहू शिमला में नौकरी करते हैं। डीएसपी चंद्रपाल ने कहा कि शवों का पोस्टमार्टम करवाने के बाद इन्हें परिजनों को सौंप दिया गया है। पंचायत प्रधान कसमैला राम दास ने बताया कि पुलिस और दमकल के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए थे।
प्रशासन की तरफ से मृतकों के परिजनों को 30 हजार फौरी राहत दी गई है। अग्निकांड में मृतक के भाई कृष्ण कुमार का कमरा भी जल गया है। इसे दस हजार फौरी राहत दी गई है।
मृतक मेहर सिंह ने अपनी जिंदगी भर की पूंजी से चैलचौक में नया मकान बनाया था। इसमें उसके बेटे ने भी मदद की थी। शुक्रवार को परिवार के साथ नए मकान में शिफ्ट होना था। इसी दौरान वीरवार सुबह हादसा हो गया। मेहर सिंह बिजली बोर्ड से सेवानिवृत्त हुए थे।