हिमाचल पथ परिवहन निगम की वोल्वो बस में सजावटी फूलों को दिल्ली न ले जाने पर गुस्साए दो किसानों ने उपमंडल घुमारवीं के दधोल चौक पर ही इन्हें जला दिया। इसके बाद बचे कुछ फूलों को लावारिस पशुओं को खाने के लिए डाल दिया। ऐसा कर इन किसानों ने निगम के प्रति भड़ास निकाली। डंगार के अजय कुमार और राजेंद्र कुमार ने बताया कि वे शनिवार रात को सजावटी फूलों की पेटियां लेकर दधोल चौक पहुंचे। यहां इन फूलों को एचआरटीसी की बस में किराया देकर दिल्ली भेजना था।
रात करीब 8:30 बजे रिवालसर से दिल्ली जाने वाली वोल्वो बस आई। परिचालक को बताया कि बस में फूल दिल्ली भेजने हैं। परिचालक ने फूल ले जाने से मना कर दिया और बस को आगे ले गए। एचआरटीसी बस के परिचालकों की ओर से आए दिन ऐसी मनमानी हो रही है जबकि निगम प्रबंधन ने किसानों को यह सुविधा दे रखी है। अजय और राजेंद्र ने बताया कि वह फूलों की खेती करते हैं। पूरा परिवार धूप में काम करके फूलों की कटिंग करता है।
फूलों के गुच्छे बनाए जाते हैं। इसमें भी पैसे खर्च होते हैं। शाम को पेटियों में भरकर फूल दधोल चौक पहुंचाए जाते हैं, जहां से इन फूलों को दिल्ली भेजा जाना होता है। फूलों का उचित किराया बस परिचालकों को दिया जाता है। लेकिन उन पर निगम के परिचालकों की मनमानी भारी पड़ रही है। आए दिन परिचालक फूलों को ले जाने से मना करते हैं। इस कारण हजारों रुपये के फूल बर्बाद हो जाते हैं। कुछ दिन पहले भी वोल्वो बस के परिचालक ने फूल ले जाने से मना कर दिया तो वह गाड़ी में लोड करके फूलों को घुमारवीं बस अड्डा ले गए।
परिचालक से गुजारिश की लेकिन फिर भी फूल ले जाने से मना कर दिया जबकि सरकार के निर्देश हैं कि किसान अपने फूल बसों में भेज सकते हैं। बताया कि इससे पहले भी इस बारे में अधिकारियों को अवगत कराया था। अधिकारियों का तर्क है कि किसानों को पहले बस अड्डा पर रसीद कटवानी पड़ेगी। इससे उन पर और अधिक बोझ पड़ेगा। रसीद कटवाने के लिए उन्हें 20 किलोमीटर दूर हजारों रुपये टैक्सी का खर्च कर घुमारवी पहुंचना होगा।
एचआरटीसी बिलासपुर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक जोगिंद्र चौधरी ने बताया कि फूल ले जाने के आदेश चालकों और परिचालकों को दिए गए हैं। लेकिन फिर भी फूल भेजने के लिए घुमारवीं बस अड्डा पहुंचकर रसीद कटवानी पड़ेगी।