अब दफ्तर के चक्कर काट रहे शहरवासी, राजधानी में टैक्स के बिल लेने के लिए नगर निगम दफ्तर पहुंच रहे लोग
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नए पोर्टल में खुद बिल जारी करने का विकल्प नहीं अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राजधानी में प्रॉपर्टी टैक्स के बिल लेने के लिए अब भी शहरवासियों को नगर निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। घर बैठे खुद ऑनलाइन बिल निकालने की सुविधा नगर निगम ने बंद कर दी है। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। शहर में करीब 35 हजार भवन मालिक हैं।
नगर निगम इस साल से शहरी विकास विभाग के बनाए नए पोर्टल के माध्यम से शहरवासियों को टैक्स के बिल जारी कर रहा है। अभी तक यह काम नगर निगम अपने पोर्टल के माध्यम से करता था। इसमें बिल जमा करने के साथ खुद अपना बिल जनरेट करने की भी सुविधा थी। लोग प्रॉपर्टी आईडी, अपना नाम या मोबाइल नंबर डालकर बिल निकाल सकते थे। इससे लोगों को नगर निगम की ओर से बिल जारी होने का इंतजार नहीं करना पड़ता था।
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अब नए पोर्टल में ऑनलाइन बिल जारी करने का विकल्प नहीं मिल रहा है। इससे लोगों को टैक्स शाखा के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। नगर निगम का कहना है कि लोगों को बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रोजाना टैक्स शाखा से 200 से 500 लोगों को बिल जारी किए जा रहे हैं। ये बिल मोबाइल मैसेज के जरिये भेजे जा रहे हैं। नगर निगम का कहना है कि जिन लोगों को अभी तक बिल नहीं मिले हैं, वह परेशान न हों। इन लोगों को आने वाले दिनों में बिल जारी कर दिए जाएंगे। निगम प्रशासन का कहना है कि बिल जारी होने के बाद लोगों को इसके भुगतान के लिए 15 दिन का समय भी दिया जाएगा।
दफ्तर पहुंच रहे लोग, कर्मचारियों का बढ़ रहा काम
कई लोग, खासकर बुजुर्ग, बिल के लिए दफ्तर पहुंच रहे हैं। इनका कहना है कि निगम अब बिल घर पर नहीं भेजता। कई लोगों को मैसेज के जरिये भी बिल नहीं मिलते। ऐसे में देरी न हो, लोग खुद ही दफ्तर आकर बिल ले रहे हैं। टैक्स शाखा में कर्मचारी बिल निकालकर लोगों को दे रहे हैं। इससे कर्मचारियों का भी काम बढ़ रहा है। वहीं नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि सभी लोगों को बिल जारी किए जाएंगे। बिल जमा करने के लिए सभी को पर्याप्त समय भी मिलेगा। ऑनलाइन बिल जनरेट करने का विकल्प भी चेक किया जा रहा है।
होटलों, सरकारी भवनों को भी टैक्स के बिल जारी
राजधानी में होटलों, सरकारी और निजी संस्थानों के बड़े भवनों को भी नगर निगम ने संपत्ति कर के बिल जारी करने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू कर दी है। अभी तक 200 वर्ग मीटर से अधिक आकार वाले भवनों को नगर निगम बिल जारी नहीं कर पा रहा था। सॉफ्टवेयर में 200 वर्ग मीटर से अधिक आकार वाले भवनों पर फ्लैट छह फीसदी की स्लैब दर लागू हो रही थी। नगर निगम ने अब शहरी विकास विभाग के माध्यम से सॉफ्टवेयर की इस गड़बड़ी को दुरुस्त करवा लिया है।