डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शोषण मुक्ति मंच ने सोमवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर प्रदेश में दलितों वर्ग के लोगों के साथ जाति आधार पर भेदभाव और अत्याचार होने के आरोप लगाए हैं।
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्पीड़न और महिलाओं के साथ हो रही बलात्कार तथा अपराध की बढ़ती घटनाएं चिंता का कारण हैं। शोषण मुक्ति मंच ने छुआछूत सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त करने और दलितों की समस्याओं तथा मांगों को लेकर जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजा। प्रदर्शन में वक्ताओं ने आरोप लगाए कि पिछले कुछ समय से अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के साथ छुआछूत जातिगत भेदभाव और मारपीट की घटनाएं बढ़ी हैं। प्रदर्शन में मंच के सह संयोजक जगत राम, राजेश कोश, विवेक कश्यप, सीता राम, गोपाल जिल्टा, बुध राम जस्ता, रोशन लाल, उमा निशा, कर्मचंद भाटिया, गजाला, रमा और रीना ने भाग लिया।
वक्ताओं ने चेताया कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं और जातिगत भेदभाव बंद नहीं किया तो मंच प्रदेश में आंदोलन करेगा। वक्ताओं ने कहा कि हमीरपुर में एक महिला से बलात्कार की कोशिश की और हमला करने के बाद उसकी मौत हो गई। प्रदेश में कानून व्यवस्था खराब हो रही है।
राज्य सरकार की उदारीकरण निजीकरण और वैश्वीकरण नीतियों का प्रभाव आज तेजी से देश और प्रदेश में देखने को मिल रहा है। इन नीतियों की वजह से जनता के अधिकारों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि जनता को असल मुद्दों से भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों को धर्म जाति के नाम पर लड़ाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति उप योजना कानून बनाने की मांग की। प्रदेश में अनुसूचित जाति जनजाति के विकास के लिए उनकी जनसंख्या के आधार पर बजट आवंटित करने, सरकारी अर्ध सरकारी विभागों में सभी प्रकार की भर्तियों में आरक्षण रोस्टर लागू करने, अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण निवारण कानून 1989 को सख्ती से लागू करने की मांग भी की। नेताओं ने सफाई कर्मचारी आयोग का गठन करने, अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि 5 लाख करने की मांग भी की।
स्थायी रोजगार देने में प्रदेश सरकार नाकाम : मंच
मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार स्थायी रोजगार देने में पूरी तरह नाकाम रही है। मल्टी टास्क वर्कर, ट्रैफिक मित्र,बिजली मित्र, पशु मित्र, पार्ट टाइम, आउट सोर्स आधार पर रोजगार दिया जा रहा है। ऐसा कर सरकार आरक्षण की सुविधा को पूरी तरह से समाप्त कर रही है। वक्ताओं ने प्रदेश सरकार से जातिगत भेदभाव, दलितों के उत्पीड़न, महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों और आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की।