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विशेषज्ञ की सलाह: नींबू-आम के लिए बनाएं गड्ढे, सेब रूट स्टॉक पर चढ़ाएं मिट्टी

Mon, 08 Jul 2019 12:16 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
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डॉ. एसके भारद्वाज - फोटो : अमर उजाला
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निचले क्षेत्रों में नींबू प्रजाति के फल, आम आदि के पौधे लगाने के लिए गड्ढे खोदने और भरने का काम पूरा कर लें। अखरोट और पीकन नट की पैच तथा एनुलर विधि से कलम करें। सेब और चेरी में क्लोनल रूट स्टॉक में मिट्टी चढ़ा दें तथा डाईबैक रोग की रोकथाम के लिए मैन्कोजेब 600 ग्राम/200 लीटर पानी का छिड़काव करें। 

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टमाटर में फल छेदक कीट की रोकथाम के लिए जब टमाटर का फल 2-3 सेंटीमीटर ब्यास का हो जाए तो फलों पर सेविन 200 ग्राम प्रति 100 लीटर में घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें। बरसाती फसल के लिए टमाटर, बैंगन और तेज मिर्च की पनीरी डालें। अदरक की गट्ठी सड़न रोग से उपचारित गट्ठियों को 3 गुणा 1 गुणा 0.20 मीटर आकार की क्यारियों में 30 गुणा 20 सेंटीमीटर फासले पर बीजें।

बेल वाली फ्रांसबीन एसवी एम-1, लक्ष्मी की बिजाई 90 गुणा 15 सेंटीमीटर की दूरी पर करें। जो किसान प्राकृतिक वातावरण वाले मशरूम हाउस में मशरूम उगाते हैं और जहां आजकल कमरे का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से अधिक है, वे किसान बटन खुंब की एगेरिकस बाइटोरकिस प्रजाति लगाएं। ये प्रजाति 20-22 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी उगाई जा सकती है। मधुमक्खियों के मौन गृहों में माइट की रोकथाम के लिए मौन गृहों की सफाई करके सल्फर की डस्टिंग करें और फोर्मिक एसिड डालें। - डॉ. एसके भारद्वाज  प्रभारी, ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी व वानिकी विवि, नौणी (सोलन)
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किसानों-बागवानोें के सवाल 
1. मेरे सेब बगीचे में कुछ कलम सूख गई थीं। क्या मैं वहां चिप बड कर सकता हूं? - राजू कमल, गांव नमाणा, ठियोग, शिमला। 

2. रूट बोरर का सही और सटीक इलाज क्या है?  - विवेक लालटा, गांव कलाहर, ठियोग, शिमला। 

अगर विशेषज्ञों से किसान-बागवान कोई सवाल पूछना चाहें तो व्हाट्सऐप नंबर 9736597365 पर संदेश भेज सकते हैं या sml-cityrepoter@sml.amarujala.com पर मेल भी कर सकते हैं। 

डॉ. एसके भारद्वाज नौणी विवि में इनवायरमेंट साइंस के प्रोफेसर ऑन हेड हैं और वे विवि में चल रहे कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से सीधे जुड़े हैं। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधित प्रोजेक्ट और रिसर्च में अब तक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

डॉ. एसके भारद्वाज पर्यावरण व मौसम और इसके उतार-चढ़ाव से फसलों को होने वाले फायदे या नुकसान का पूरा अनुभव रखते हैं और पिछले काफी समय से विवि की तरफ से किसानों व बागवानों को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।

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