हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कैथलीघाट और सोलन राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर कड़ा संज्ञान लिया है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद शर्मा व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए। उन्होंने न्यायालय को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई से पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के मार्ग में आ रही बाधाओं को दूर कर दिया जाएगा। जाम से निजात दिलाने के लिए एनएचएआई हरसंभव प्रयास कर रहा है ताकि यातायात सुचारु बना रहे। एनएचएआई ने अदालत के 14 मार्च के आदेशों की अनुपालन में नया हलफनामा दायर किया है।
इसमें उपायुक्त सोलन, पुलिस अधीक्षक और नगर निगम आयुक्त को अतिक्रमण और अवैध पार्किंग को हटाने में सहयोग करने के लिए पत्र लिखा था। कैथलीघाट और सोलन राष्ट्रीय राजमार्ग की एनएचएआई सहित डीसी सोलन से फ्रेश स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने आदेश दिए कि एनएचएआई अपनी जमीन पर जिनता भी अतिक्रमण हुआ है उसको अपने कब्जे में ले। एनएचएआई अतिक्रमण को हटाने के लिए स्वतंत्र है। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने की। मामले की अगली सुनवाई तीन अप्रैल को होगी।
बढ़ते हादसों को रोकने के लिए डीजीपी परिवहन को बनाया प्रतिवादी
राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ा होने के बावजूद यातायात नियमों की उल्लंघना के चलते सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इसको देखते हुए अदालत ने डीजीपी परिवहन को प्रतिवादी बनाया है। वाहनों में अनावश्यक तौर पर किए गए बदलाव भी चालकों और यात्रियों का ध्यान भटकाते हैं। इससे हादसे हो रहे हैं। अदालत ने निरीक्षण अधिकारी को गाड़ियों के परीक्षण के बाद फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने के कारावास के साथ 5000 से 20,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा और साथ में लाइसेंस भी रद्द होगा।