दो घंटे तक इंतजार करते रहे डीसी, शिमला बचत भवन में सुबह 11 बजे होने थे चुनाव, अब दोबारा तय होगी चुनाव के लिए तिथि
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अगली बैठक में 50 फीसदी सदस्य आने पर कोरम माना जाएगा पूरा संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला परिषद शिमला के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए अभी इंतजार करना होगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के सदस्यों के चुनाव प्रक्रिया से दूरी बनाने के कारण सोमवार को होने वाले चुनाव टालने पड़े। अब चुनाव की नई तिथि तय की जाएगी। दूसरी बैठक में यह कोरम 50 फीसदी रह जाएगा। ऐसे में अगली बैठक में 13 सदस्यों की मौजूदगी में भी चुनाव करवाए जा सकेंगे।
पीठासीन अधिकारी एवं उपायुक्त अनुपम कश्यप दो घंटे तक बचत भवन में सदस्यों का इंतजार करते रहे लेकिन चुनाव के लिए बुलाई बैठक में एक भी सदस्य नहीं पहुंचा। डीसी ने जिला पंचायत अधिकारी को निर्देश जारी किए हैं कि वह इस संबंध में पूरी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें। रिपोर्ट में पंचायत अधिकारी यह बताएंगे कि आखिर सदस्य चुनाव प्रक्रिया में शामिल क्यों नहीं हुए। जिला प्रशासन ने दो महीने से लंबित जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए सोमवार सुबह 11 बजे बचत भवन में सभी सदस्यों की बैठक बुलाई थी। जिला पंचायत अधिकारी की ओर से सुबह 10:30 बजे बचत भवन में मतपेटियां भी स्थापित कर दी थीं। यह मतपेटियां दो अलग-अलग रंगों में रखी थीं। बचत भवन के बाहर पुलिस का भी कड़ा पहरा लगाया था। सुबह करीब 11 बजे पीठासीन अधिकारी एवं उपायुक्त अनुपम कश्यप बचत भवन पहुंचे और अधिकारियों से चुनाव संबंधी जानकारी ली। इसके बाद बैठक स्थल पर बैठ गए। दो घंटे तक इंतजार करने के बावजूद न तो कांग्रेस और न ही भाजपा समर्थित जिला परिषद सदस्य चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने पहुंचे। दोपहर एक बजे तक जब किसी भी दल का कोई सदस्य नहीं पहुंचा तो उपायुक्त लौट गए। चुनाव के लिए रखी मतपेटियां अधिकारी अपने साथ ले गए।
कांग्रेस और भाजपा के दावों की खुली पोल
जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के सदस्यों के नहीं पहुंचने से सियासत भी गरमा गई है। दोनों दल जिला परिषद की कमान संभालने को लेकर दावा कर रहे थे कि उनके पास बहुमत है। सोमवार को होने वाली पहली बैठक में दो-तिहाई यानी 17 सदस्यों की मौजूदगी कोरम के लिए जरूरी थी। सूत्रों के अनुसार दोनों दलों में बहुमत को लेकर असमंजस की स्थिति है। यही वजह मानी जा रही है कि दोनों दल चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने से पीछे हटे हैं।