गदर फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष रवि कुमार ने आरोप लगाया कि 11 जुलाई को दंगल मेले में प्रस्तुत नाटक में एक समुदाय को कथित तौर पर अपमानजनक, भेदभावपूर्ण और जातिवादी तरीके से चित्रित किया गया। ऐसी प्रस्तुति न केवल संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि समाज में सौहार्द और समरसता को भी ठेस पहुंचाती है। उन्होंने मामले से जुड़े प्रधानाचार्य और कथित रूप से जिम्मेदार शिक्षकों को तत्काल निलंबित अथवा सेवा से बर्खास्त किया जाए।
साथ ही उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। फ्रंट ने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने उपायुक्त चंबा से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है और प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी निगरानी की जा रही है।