हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित इंडियन टेक्नोमैक कंपनी बैंक कर्ज घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ओडिशा के बारबिल में 7 प्लॉट/फ्लैटों के रूप में 21.15 करोड़ रुपये की 18 संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की है। इसमें खोरधा में 6 प्लॉट, कटक में एक आवासीय फ्लैट और भुवनेश्वर में चार संपत्तियां शामिल हैं। ये सभी संपत्तियां मैसर्स अनमोल लिमिटेड की हैं। ईडी मैसर्स इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड(आईटीसीओएल) और इसके प्रमोटरों के खिलाफ सीआईडी, हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया कि मैसर्स आईटीसीओएल के निदेशकों ने विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ मिलकर बैंकों के संघ से लिया गया ऋण हड़प लिया। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि मैसर्स आईटीसीओएल ने वर्ष 2009 से लेकर 2013 तक बैंक अधिकारियों के समक्ष फर्जी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करके शेल कंपनियों के नाम पर फर्जी ब्रिकी दिखाकर बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के संघ से ऋण प्राप्त किया और जिस उद्देश्य के लिए कर्ज लिया गया, उसका उस उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया गया। ऐसे में ईडी ने जांच में मिले साक्ष्य के आधार पर ये कार्रवाई अमल में लाई है। ईडी मामले की जांच के तहत अब तक 310.06 करोड़ की संपत्ति अटैच कर चुकी है। आईटीसीओएल ने अधिकांश ऋण राशि का उपयोग अचल संपत्तियों जैसे जमीन, क्रूसिबल और संरचनात्मक कार्यों के निर्माण आदि पर किया । मामले में आगे की जांच जारी है।