दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (रिपन)
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दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जोनल अस्पताल शिमला में फार्मासिस्टों के इमरजेंसी ड्यूटी पर न आने से दिक्कतें बढ़ना शुरू हो गई हैं।
आलम यह है कि आपातकालीन विभाग में अब चिकित्सक मरीज के उपचार के साथ दर्द निवारक इंजेक्शन और पट्टियां करने का काम भी स्वयं कर रहे हैं। इस वजह से ओपीडी में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। शहर के डीडीयू अस्पताल के आपातकालीन विभाग में अधिकांश मरीज गेस्टि्रक, गिरकर चोटिल होने या अन्य बीमारियों से ग्रस्त होने के बाद उपचार के लिए आते हैं। आपातकालीन में इन्हें प्राथमिक उपचार दिया जाता है। लेकिन अब विभाग में फार्मासिस्ट कर्मियों के सेवाएं न देने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
स्थिति यह बन गई है कि चिकित्सकों को मरीजों की पर्ची बनाने, उपचार देने के साथ पट्टी और इंजेक्शन लगाने का काम भी करना पड़ रहा है। इन सभी कार्यों में समय लगता है तो ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए देरी का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन विभाग में 24 घंटे के दौरान रोजाना औसतन 100 से 120 मरीज उपचार करवाते हैं। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि आपातकालीन विभाग में फार्मासिस्टों के ड्यूटी न देने को लेकर अस्पताल प्रबंधन की ओर से जो नोटिस दिया है, उसका जवाब लिखित में मिल गया है।
पीजी के साथ इंटर्न की लगाई है ड्यूटी
डीडीयू अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचआर ठाकुर ने बताया कि मरीजों को उपचार के लिए परेशानी न झेलनी पड़े इसलिए एक कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर के साथ दो पीजी और इंटर्न प्रशिक्षु की ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के संबंधित वार्ड सिस्टर की ड्यूटी भी लगाई है।