अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों को कुत्तों से राहत दिलाने और लावारिस कुत्तों की नसबंदी के लिए पशुपालन विभाग ने जिस डॉक्टर की नगर निगम में तैनाती की उसने 11 माह बाद भी ज्वाइनिंग नहीं दी। डॉक्टर न होने से महीनों तक नगर निगम में नसबंदी का काम ठप पड़ा है।
नगर निगम के नए आयुक्त सचिन कंवल को जब इसका पता चला तो उन्होंने डॉक्टर को दफ्तर बुलाकर जवाब तलब किया। साथ ही निगम स्वास्थ्य अधिकारी से भी डॉक्टर के महीनों तक गायब रहने कारण पूछा। आयुक्त ने वेटनरी डॉक्टर से पूछा कि आखिर अभी तक ज्वाॅइनिंग क्यों नहीं दी। विभाग ने जब अक्तूबर 2025 में नगर निगम के लिए तबादला आदेश जारी कर दिए थे तो 11 माह से डॉक्टर कहां गायब रहे। डॉक्टर ने कहा कि अब उनकी पदोन्नति हो गई है, उन्हें नई जगह तैनाती मिलनी है।
आयुक्त ने कहा कि उनके पिछले आदेश नगर निगम के लिए हुए थे। नियमों के अनुसार डॉक्टर को तुरंत नगर निगम में ज्वॉइनिंग देनी चाहिए थी। यदि पदोन्नति हुई है तो जब तक सरकार नए आदेश नहीं कर देती, तब तक डॉक्टर को नगर निगम में सेवाएं देनी होंगी। निगम को जब जरूरत पड़ेगी तो डॉक्टर को रिपोर्ट करना होगा। आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि डॉक्टर से दफ्तर बुलाकर जवाब लिया है। इसके बाद अब डॉक्टर ने रिपोर्ट दी है कि वह निगम में सेवाएं दे रहे हैं। शहर में फिर से लावारिस कुत्तों को पकड़ने और इनकी नसबंदी का काम भी शुरू किया जा रहा है। लोगों को जल्द कुत्तों के आतंक से राहत दिलाई जाएगी।