प्रदेश अराजपत्रित महासंघ में फिर से विरोध के स्वर गूंजे हैं। अध्यक्ष पद पर सहमति बनने के बाद अब दोनों गुट राज्य कार्यकारिणी को लेकर आमने-सामने हो गए हैं। चीफ सेक्रेटरी ने दोनों गुटों से ज्वाइंट समझौता पत्र मांगा है, ताकि महासंघ की अधिसूचना जारी की जा सके।
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लेकिन, महासंघ के अध्यक्ष सुरेंद्र मनकोटिया ने समानांतर गुट के अध्यक्ष एसएस जोगटा को ज्वाइंट लेटर पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है। उन्होंने तर्क दिया है कि राज्य कार्यकारिणी में उनके साथ जुड़े संगठन के पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाए।
अगर ऐसा नहीं होता है तो हस्ताक्षर नहीं होंगे। एसएस जोगटा ने कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उनके नाम पर अध्यक्ष पद की मोहर लगा दी है। अगर मनकोटिया ज्वाइंट लेटर पर हस्ताक्षर नहीं भी करते हैं तो भी राज्य कार्यकारिणी बनेगी।
दोनों गुटों को एक होने की दी थी सलाह
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दोनों गुटों को एक होने की सलाह दी थी। दोनों गुटों के अध्यक्षों ने आपसी समझौता कर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात की। इसमें मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एसएस जोगटा को अध्यक्ष और गोपाल शर्मा को महासचिव बनाए जाने की बात कही, जबकि सुरेंद्र मनकोटिया को पेंशन कल्याण बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाने को कहा। अध्यक्ष और महासचिव पर सहमति होने के बाद एसएस जोगटा चीफ सेक्रेटरी से मिले और उन्होंने राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त महासंघ की नोटिफिकेशन जारी करने की मांग की, लेकिन चीफ सेक्रेटरी ने जोगटा से दोनों गुटों के बीच हुए समझौते का पत्र मांगा है।
जिला और ब्लॉक कमेटी तय करेगी कार्यकारिणी: मनकोटिया
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (मनकोटिया गुट) के अध्यक्ष सुरेंद्र मनकोटिया ने कहा कि एसएस जोगटा अपनी मनमर्जी से कार्यकारिणी नहीं बना सकते हैं। इसके लिए पहले जिला और ब्लॉक कार्यकारिणी के साथ बैठक होनी चाहिए। इस कार्यकारिणी की सहमति से राज्य कार्यकारिणी बनेगी।
अगर एसएस जोगटा जिला और ब्लॉक कमेटियों को बिना विश्वास में लिए कार्यकारिणी बनाते हैं तो समझौता पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। राज्य कार्यकारिणी में मेरे संगठन के पदाधिकारियों को भी शामिल करना होगा।
बिना साइन किए भी विस्तार होगा: जोगटा
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष (जोगटा गुट) एसएस जोगटा ने बताया कि अगर सुरेंद्र मनकोटिया समझौता पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं तो बिना साइन किए भी कार्यकारिणी का विस्तार होगा। जेसीसी करनी है, इसके चलते कार्यकारिणी का विस्तार किया जाना है। कार्यकारिणी में कौन होगा, कौन नहीं, इसका फैसला अध्यक्ष और महासचिव करेंगे।