प्रदेश भाजपा की सियासी पिच पर अपनों के बीच घिर चुके योजना बोर्ड के अध्यक्ष एवं ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला अब अपने सियासी गुरु पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की शरण में पहुंचे हैं। हाईकमान की ओर से ज्वालामुखी भाजपा मंडल कार्यकारिणी को किए जाने से नाराज धवाला अब शांता कुमार के पास आए हैं। उन्होंने शांता से लंबी बातचीत की है। हालांकि, दोनों में क्या बातचीत हुई, इसकी जानकारी नहीं लग पाई, लेकिन बताया जा रहा है कि धवाला कांग्रेस के बजाय अपनों की ही सियासत से खफा हैं। इसी मामले को उन्होंने शांता के समक्ष बयां किया है। सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान ने अब भी रमेश धवाला की नहीं सुनी तो इसका सीधा असर कांगड़ा जिले के सबसे बड़े वोट बैंक ओबीसी का पार्टी पर पड़ सकता है।
धवाला ऐसे ओबीसी नेता हैं जो जमीन से जुड़े ओबीसी वोटर तक अपनी पकड़ रखते हैं। जगजाहिर है कि ज्वालामुखी में विधायक रमेश धवाला की अपनी ही पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री और ज्वालामुखी विधानसभा के रहने वाले पवन राणा से सियासी कशमकश चली हुई है। ज्वालामुखी की ज्वाला को शांत करने के बजाय अब प्रदेश भाजपा ने धवाला की सारी मंडल कार्यकारिणी को भंग कर इसमें घी डाल कर और भड़का दिया है। ज्वालामुखी भाजपा में घट रहे घटनाक्रम को लेकर आहत शांता कुमार पहले भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप से बात कर चुके हैं। इसमें शांता कुमार ने यह बात भी कही थी कि 1998 में भाजपा की सरकार बनाने में धवाला ने लाखों रुपये ठुकरा दिए थे। बताया जा रहा है कि शांता ने धवाला को संयम बरतने की बात कही है।