नगर निगम की बैठक में पानी के मुद्दे पर हंगामा हो गया। पार्षदों ने साफ किया अब आश्वासन नहीं। लोगों को पानी चाहिए। एमसी तय करे कि कम से कम तीसरे दिन पानी की नियमित और भरपूर आपूर्ति की जाए। पानी की समस्या पर अपनी जिम्मेदारी से लगातार पीछे हट रहे एमसी ने भी आखिरकार मान लिया कि पिछले दस माह से शहर में पानी की आपूर्ति गड़बड़ चल रही है। इसके कई कारण हैं।
पार्षदों ने पानी का सही वितरण नहीं होने के लिए की-मैन के तबादलों को भी कारण मानते हुए इन्हें पहले की तरह से उसी क्षेत्र में तैनाती देने की एकजुट होकर मांग उठाई। उप महापौर की अध्यक्षता में हुई सदन बैठक में नगर निगम आयुक्त पंकज रॉय ने खुद कबूल किया कि नगर निगम पिछले करीब दस माह से शहर की जनता को पानी की सप्लाई नियमित देने में नाकाम रहा है। इसकी कई वजह रही हैं।
इसमें सुधार के प्रयास जारी हैं। उन्होंने पार्षदों की लाइनमैन को पहले की तरह से तैनाती की मांग के मामले को न्यायालय के समक्ष रखे जाने का भरोसा दिया और मंगलवार को सुधार के लिए पेयजल आपूर्ति में लगे सर्कल के एसई सहित समस्त अधिकारियों की बैठक बुलाकर समस्या के समाधान के लिए फैसला लेने का भरोसा दिया।
बैठक में छोटा शिमला पार्षद सुरेंद्र चौहान लक्ष्मी कश्यप, सत्या कौंडल, शैलेंद्र चौहान, नरेंद्र ठाकुर सहित मौजूद पार्षदों ने कहा कि नगर निगम के हर वार्ड में भले ही तीसरे दिन पानी की सप्लाई मिले मगर यह सुनिश्चित किया जाए कि लोगों को पानी मिले। चमियाणा, छोटा शिमला के पार्षदों ने कहा कि लोगों को सातवें दिन भी पानी नसीब नहीं हो रहा है।
इस पर कमिश्नर पंकज रॉय ने कहा कि एमसी एरिया के लिए अलग सर्कल बनाने और लिफ्टिंग से लेकर वितरण तक का सारा काम अपने पास लेने के बावजूद पेयजल आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ है। मुखिया होने के नाते वे इस कबूल करते हैं।
उन्होंने माना कि की- मैन को बदले जाने से भी समस्या बढ़ी है, वहीं अश्वनी का पानी बंद करने और वहां से दोबारा चालू होने के बाद दो से तीन एमएलडी पानी कम हुआ है, संजौली से छोटा शिमला विकासनगर को पानी दिए जाने से भी समस्या खड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि गिरी लाइन में होने वाली लीकेज को रोकने के लिए करीब तीन सौ मीटर लाइन बदलना बाकी है। इसमें करीब पांच एमएलडी पानी लीकेज हो रही है। इसे भी जल्द रोक लिया जाएगा।
आखिर माना एमसी, 10 माह से पेयजल की आपूर्ति देने में नाकाम
उप महापौर की अध्यक्षता में हुई सदन बैठक में नगर निगम आयुक्त पंकज रॉय ने खुद कबूल किया कि नगर निगम पिछले करीब दस माह से शहर की जनता को पानी की सप्लाई नियमित देने में नाकाम रहा है। इसकी कई वजह रही हैं। इसमें सुधार के प्रयास जारी हैं। उन्होंने पार्षदों की लाइनमैन को पहले की तरह से तैनाती की मांग के मामले को न्यायालय के समक्ष रखे जाने का भरोसा दिया और मंगलवार को सुधार के लिए पेयजल आपूर्ति में लगे सर्कल के एसई सहित समस्त अधिकारियों की बैठक बुलाकर समस्या के समाधान के लिए फैसला लेने का भरोसा दिया।
एमसी, लिफ्ट पार्किंग में अब एक सामान होंगी पार्किंग दरें
नगर निगम की मासिक बैठक में पीपीपी मोड पर लिफ्ट के समीप बनी पार्किंग और इससे सटी नगर निगम की पार्किंग की दरों को भविष्य में एक समान किए जाने प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी गई। नगर निगम और पार्किंग कांप्लेक्स के कंपनी के बीच हुए करार के मुताबिक नगर निगम को दोनों जगह पार्किंग के लिए तय की गई दरों के मुताबिक वसूली करनी है। सदन में रखे गए इस प्रस्ताव का शिमला शहरी विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश भारद्वाज ने हालांकि यह कह कर विरोध किया कि नगर निगम प्रिंसिपल एजेंसी है, वह ठेकेदार को रेट में फॉलो नहीं करेगी।
उन्होंने यह कहकर विरोध किया कि जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा दरों को न बढ़ाया जाए। इस पर उपमहापौर टिकेंद्र सिंह पंवर और आयुक्त पंकज रॉय ने बताया कि 2011 में निर्माण और पार्किंग कांप्लेक्स संचालक कंपनी और ठेकेदार के साथ हुए करार में पार्किंग की दरें पहले ही तय की गई थी। उन्हीं दरों को अब एग्रीमेंट के मुताबिक नगर निगम को लागू करना है। नगर निगम की पार्किंग कर ठेका दोबारा आवंटित किए जाने पर तय दरें ही लागू की जाएगी। इससे दोनों पार्किंग की दरों में एकरूपता आएगी।
इस मुद्दे पर पार्षद अनुप वैद्य ने भी विरोध जताया। इस पर कमिश्नर ने कहा कि यह एफसी पीसी का फैसला है। इस पर कुछ देर सदन गर्माया, अंत में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। उपमहापौर ने कहा कि नगर निगम की ठेके पर दी गई पाकिंग में कुछ मदें पीपीपी मोड पार्किंग की दरों से अधिक हैं, तो कुछ पीपीपी मोड पार्किंग में अधिक हैं। इसे एक समान किए जाने से कुछ दरें निगम की पार्किंग की में भी कम होगी।
एक समान करने के बाद ये होगी पार्किंग दरें
गाड़ी पार्क का समय घंटे में दरें
0-2 35
2-4 या 0-4 58
4-8 या 0-8 92
8-12 या 0-12 115
12-24 या 0-24 173