हिमाचल प्रदेश के 153 प्राइमरी स्कूलों में विद्यार्थियों के शून्य दाखिलों पर जिला अधिकारियों से जवाब तलबी हो गई है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने इन स्कूलों में एक भी दाखिला नहीं होने के जिला शिक्षा अधिकारियों से कारण पूछे हैं। जिलों की रिपोर्ट के आधार पर सरकार को इन स्कूलों के भविष्य को लेकर प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके अलावा एक शिक्षक के सहारे चल रहे स्कूलों में शिक्षकों की अधिक भर्ती को लेकर निदेशालय को समय-समय पर भेजे गए प्रस्तावों की जानकारी भी जिला अधिकारियों से मांगी गई है।
अमर उजाला ने तीन मई के अंक में ‘हिमाचल के 153 प्राइमरी स्कूलों में एक भी विद्यार्थी ने नहीं लिया दाखिला’ शीर्षक से खराब प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने शिक्षा सचिव और शिक्षा मंत्री के साथ मामले को लेकर अनौपचारिक चर्चा की। अब प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने विद्यार्थियों के शून्य दाखिलों वाले स्कूलों के प्रभारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों से इसके कारण पूछे हैं।
निदेशालय ने पूछा है कि क्या शून्य दाखिले वाले स्कूल दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित हैं? इन स्कूलों की जगह साथ लगते सरकारी स्कूलों को विद्यार्थी अधिक तवज्जो दे रहे हैं? क्या साथ लगते निजी स्कूलों में अधिक दाखिले हो रहे हैं? क्या शून्य दाखिलों वाले स्कूलों में शिक्षकों की कमी है? क्या इन स्कूलों में पढ़ाई सही तरीके से नहीं हो रही? जिला शिक्षा अधिकारियों से इन स्कूलों में दाखिले बढ़ाने को बनाए प्लान भी देने को कहा गया है।
इन सभी बिंदुओं पर जानकारी मिलने के बाद निदेशालय की ओर से सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। बता दें कि शैक्षणिक सत्र 2022-23 के दौरान किसी भी विद्यार्थी ने 153 प्राइमरी स्कूलों में दाखिले नहीं लिए हैं। जिला शिमला में सबसे अधिक 39, कांगड़ा में 30 और मंडी जिला में ऐसे 26 स्कूल हैं। दस विद्यार्थियों की संख्या वाले 2100, 6 से 9 बच्चों वाले 1274 और 5 बच्चों वाले 673 स्कूल हैं।