प्रदेश के 9 जिलों में डिजिटल राशनकार्ड नहीं बनेंगे। इसका कारण खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के पास बजट न होना है। सरकार ने तीन जिलों में डिजिटल राशनकार्ड का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए 6 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई है। 12 जिलों में डिजिटल राशनकार्ड बनाने के लिए सरकार को 42 करोड़ रुपये की जरूरत है।
प्रदेश सरकार ने शिमला, कांगड़ा और ऊना जिले में डिजिटल राशनकार्ड का काम शुरू कर दिया है। एटीएम कार्ड की तर्ज पर लोगों के कंप्यूटरीकृत राशनकार्ड बनाए जा रहे हैं। डिपो में मशीनें लगाई जाएंगी। इन कार्डों को मशीनों में स्क्रेच करके पता चल पाएगा कि एक राशनकार्ड में कितने सदस्य हैं और परिवार को कितना राशन मिलना है।