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अगली बार स्टेडियम में पूजा करेंगे इंद्रुनाग देवता के पुजारी

Fri, 13 Mar 2020 01:56 PM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन चौधरी, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
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- फोटो : अमर उजाला
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भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सीरीज के पहले वन डे मैच के रद्द होने तक मौसम और कोरोनावायरस से ज्यादा बारिश के देवता इंद्रुनाग की गूंज रही। धर्मशाला स्टेडियम में अगला मैच भी बारिश की भेंट न चढ़े इसके लिए अगली बार इंद्रुनाग देवता के पुजारी क्रिकेट मैदान पर जाकर पूजा अर्चना करेंगे, ताकि बारिश को टाला जा सके। यह बात खुद धर्मशाला देवता के पुजारी विपिन ने कही।

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इंद्रूनाग देवता के पुजारी विपिन ने बताया कि मैच से पहले एचपीसीए प्रबंधन ने पूरे विधि विधान से पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किया था। देवता ने सफल मैच के आयोजन का आशीर्वाद दिया था। अगले मैच में वह खुद क्रिकेट मैदान में जाकर पूजा-अर्चना करेंगे। एचपीसीए प्रबंधन को अब कहा है कि अगली बार इंद्रुनाग देवता को सूखे चने का भोग लगाकर साधारण न्योता दें। भंडारा मैच के सफल आयोजन के बाद दें। उधर, धर्मशाला में लोग यह भी कहते सुने गए कि इंद्रुनाग देवता अभी भी एचपीसीए से नाराज हैं।

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पिछले मैच में अनुराग ठाकुर ने मांगी थी देवता से माफी

सितंबर 2019 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाला टी 20 मैच से पहले एचपीसीए ने इंद्रूनाग देवता के मंदिर में जाकर पूजा अर्चना नहीं थी। इसके बाद मैच के दिन जब सुबह बारिश शुरू हुई तो एचपीसीए को अपनी गलती का अहसास हुआ और देवता की शरण में पहुंच गया। 15 सितंबर, 2019 को टी-20 मैच के अवसर पर हुए खेल पात्र के दौरान देवता के कारिंदों ने बीसीसीआई के पर्वू अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को क्षेत्र के अराध्य देवता इंद्रुनाग के दर आकर पूजा-पाठ करने के निर्देश दिए थे।

अनुराग ठाकुर इंद्रुनाग के मंदिर में तो नहीं जा पाए थे लेकिन स्टेडियम में ही उन्होंने और एचपीसीए के सभी सदस्यों ने देवता से माफी मांगी थी। लेकिन, देवता नहीं माने और स्टेडियम में खूब बारिश हुई तथा मैच रद्द हो गया था। जबकि, स्टेडियम के आसपास बारिश नहीं हो रही थी। अनुराग ठाकुर के भाई अरुण धूमल अब एचपीसीए के अध्यक्ष हैं। लेकिन, इस बार वह भी इंद्रुनाग देवता की पूजा अर्चना में नहीं आए थे।

क्या है देवता की मान्यता
जिला मुख्यालय के साथ लगते खनियारा में बारिश के देवता इंद्रुनाग का विशेष महत्व है। क्षेत्र में किसी भी परिवार में किसी भी तरह का आयोजन होता है, उस दौरान देवता को समारोह में न आने का न्योता दिया जाता है, ताकि उनका समारोह बिना बारिश के सफल हो सके। वहीं क्षेत्र के किसान भी नई फसल की कटाई से पहले इंद्रुनाग देवता की पूजा अर्चना कर उन्हें भोग लगाते हैं। साथ ही नई फसल का सबसे पहले इंद्रुनाग देवता को भी भोग लगाया जाता है।
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