चिंतपूर्णी मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु आशीर्वाद लेने पहुंचे। लंबी कतारें पूरा दिन पुराने बस स्टैंड के आगे तक लगी रहीं। तीखी धूप व गर्मी के बीच श्रद्धालुओं को माता रानी के दर्शन के लिए पांच से छह घंटे का समय लगा।
प्रदेश के शक्तिपीठों में रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। चिंतपूर्णी शक्तिपीठ में तो भक्तों को धूप में लंबी कतारों में खड़े होकर छह घंटे के बाद मैया के दर्शन हुए। जिला कांगड़ा में तीनों प्रमुख शक्तिपीठों में करीब 27 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। इस दौरान ज्वालामुखी मंदिर में करीब 18 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया।
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वहीं, श्री चामुंडा नंदिकेश्वर धाम में छह हजार और बज्रेश्वरी धाम कांगड़ा में करीब तीन हजार श्रद्धालुओं ने मंदिर में हाजिरी भरी। वहीं, विश्वप्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी मंदिर में व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहीं। मंदिर प्रशासन भीड़ वाले दिन व्यवस्थाएं बनाने में पूरी तरह से असफल दिखा। रविवार को माता रानी के दरबार में भारी संख्या में श्रद्धालु आशीर्वाद लेने पहुंचे। लंबी कतारें पूरा दिन पुराने बस स्टैंड के आगे तक लगी रहीं।
तीखी धूप व गर्मी के बीच श्रद्धालुओं को माता रानी के दर्शन के लिए पांच से छह घंटे का समय लगा। कई श्रद्धालु लंबी लाइनों के चलते और ज्यादा समय लगने के कारण बिना दर्शन के ही घर लौट गए। गुजरात से आए दो श्रद्धालुओं प्रदीप और दीपक ने बताया कि वे ढाई घंटे से लाइन में लगे हुए थे। लेकिन, खराब व्यवस्था से परेशान होकर बिना दर्शन के ही लौट रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मां के दरबार में हजारों लोग आते हैं।
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ऐसे में मंदिर न्यास को यहां बेहतर प्रबंध करने चाहिए। वहीं, बुजुर्ग और दिव्यांगों के लिए दर्शनों को लेकर बनाई गई व्यवस्था भी श्रद्धालुओं को रास नहीं आई। उनका कहना है कि बुजुर्ग और बीमार लोगों को कतार में लगकर धक्के खाकर माता रानी के दरबार पहुंचना पड़ रहा है। लिफ्ट लगातार बंद रहने से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।