शिमला जिला के जनप्रतिनिधियों के लिए विकास कार्यों में गति लाने के लिए नया फार्मूला सुझाया है। इलाके में विकास कार्यों को लेकर उपायुक्त कार्यालय में आने वाले जनप्रतिनिधि पूरी तैयारी के साथ आएं। मौजूद समय में अधिकांश जन प्रतिनिधि सादे कागज पर विकास कार्यों को लेकर बजट देने का अनुरोध करते हैं।
उदाहरण के लिए कोई पंचायत में डंगा लगाने के लिए पचास हजार की डिमांड करते हैं प्रशासन की ओर से इसका तकनीकी कर्मचारी से तैयार करवाते हैं क्योंकि जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर इसे तैयार नहीं कर सकता। इस प्रक्रिया में काफी लंबा वक्त जाया हो जाता है और अधिकांश अर्जियां फाइलों में ही कहीं खो जाती हैं।
जनप्रतिनिधियों को भी बार बार उपायुक्त कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। इन सब बाधाओं को दूर करने के लिए जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया गया है कि पहले वह संबंधित विकास कार्य पंचायत से पारित करवाएं उसके बाद कार्य पर कितना अनुमानित खर्चा होगा उसका प्रस्ताव संबंधित तकनीकी कर्मचारी से तैयार करवाएं और फिर प्रस्ताव को लेकर उपायुक्त कार्यालय में आए इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और समय रहते काम भी पूरा हो जाएगा।
उपायुक्त के आग्रह का कितने जन प्रतिनिधियों पर असर पड़ेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इस फार्मूले के साथ चलने वाले जन प्रतिनिधि अपने इलाके में काफी हद तक विकास कार्यों को शीघ्र करवाने में सफल होंगे ऐसा अनुमान जताया जा रहा है।
उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों से अनुरोध है कि वह अपने क्षेत्र से संबंधित विकास कार्यों के प्रस्ताव संबंधित पंचायत से पारित होने के बाद अनुमानित प्राक्कलन के साथ प्रस्तुत करें, ताकि जिला प्रशासन की ओर से विकासात्मक कार्यों को प्रभावी रूप तथा शीघ्रता से पूरा किया जा सके।