हिमाचल प्रदेश सरकार ने आम लोगों से लेकर पर्यटकों को रोपवे का सस्ता सफर कराने के लिए बड़ी कवायद शुरू की है। रोपवे को बढ़ावा देने और लोगों को सस्ता सफर मुहैया कराने के लिए जीएसटी काउंसिल से इस पर लगने वाले टैक्स को 18 से घटाकर 5 फीसदी करने की मांग की गई है। लखनऊ में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में प्रदेश से गए अधिकारियों ने इस संबंध में लिखित में आग्रह किया है।
दरअसल, सड़कों के चौड़ीकरण में आ रही भारी लागत और दरकते पहाड़ों की दिक्कतों के बीच प्रदेश में रोप वे ही परिवहन का प्रमुख विकल्प बनता जा रहा है। कई प्रोजेक्टों को अमलीजामा पहनाने की कवायद अंतिम दौर में पहुंच गई है। लेकिन चूंकि हिमाचल के पास इतना बजट नहीं है कि रोप चला सके। ऐसे में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत इन रोपवे को बनाने में 18 फीसदी जीएसटी ही आड़े आ रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव राज्य कर एवं आबकारी जेसी शर्मा ने बताया कि अगर टैक्स कम होता है तो इससे न सिर्फ सरकार को निवेशक हासिल करने में आसानी होगी, बल्कि कम लागत से बनने वाले रोपवे का टिकट भी और सस्ता होगा। इससे लोग खुद भी निजी वाहनों की बजाय इस नए विकल्प का प्रयोग परिवहन के लिए करेंगे।
गडकरी की पैरवी के बाद रोपवे नेटवर्क पर जोर
हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिमाचल दौरे के दौरान रोपवे को बढ़ावा देने पर जोर दिया था। इसके बाद अब सरकार रोपवे को लेकर खास फोकस कर रही है। वर्तमान में राजधानी में जाखू रोप वे चल रहा है। धर्मशाला व मैक्लोडगंज वाला रोपवे भी शुरू हो जाएगा। आनंदपुर साहिब से नैना देवी, पलचान से रोहतांग व बिजली महादेव के लिए भी रोपवे बनाने की कवायद की जा रही है। राजधानी शिमला व धर्मशाला शहर के लिए रोपवे कारपोरेशन अलग से लोकल कनेक्टिविटी प्लान तैयार कर रहा है। इसके अलावा भी विभिन्न शहरों में फिजिबिलिटी का अध्ययन किया जा रहा है।